यहेजकेल 25:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“परमेश्‍वर यहोवा यह कहता है : क्योंकि पलिश्ती लोगों ने पलटा लिया, वरन् अपनी युग-युग की शत्रुता के कारण अपने मन के अभिमान से बदला लिया* कि नाश करें,

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यहेजकेल 25:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहेजकेल 25:15 पर एक एकीकृत व्याख्या

मुख्य बिंदु: पलिश्तियों की नीति-परित्याग-युक्त रणनीति और परमेश्वर की न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया—उन्होंने प्रेरित होकर बदला लिया, जिससे उनका विनाश और शत्रुओं के विरुद्ध परखा गया उभयात्मा उजागर हुआ। यह दृश्य हमें यह दिखाता है कि परमेश्वर की योजना में शत्रुओं के भी दिल बदलते हैं और उनका परिणाम उनके ही हृदय की गलतियों का फल होता है।

साहित्यिक संदर्भ (पाठ के संकलन के संगठन के अनुरूप)

यह भाग पलिश्तियों के विरुद्ध यहोवा के दायरे में स्थित एक न्याय-संकेत है, जहाँ पूर्व के शत्रुतापूर्ण सम्बन्ध के बावजूद परमेश्वर यहोवा ने उनकी रणनीति पर खामोशी से चोट की। यह संदेश सत्रहवीं-शताब्दी ईसा पूर्व की नीतियों से अलग एक दया-युक्त और स्थितिप्रबल्य दृष्टिकोण को दिखाता है: देव-न्याय का समय और दिशा कभी भी निष्प्रभावी नहीं रहता।

आध्यात्मिक महत्व

इस पद में परमेश्वर यहोवा पलिश्ती लोगों के व्यवहार पर एक चेतावनी देते हैं: उनके अभिमान से उठी शत्रुता और दुष्प्रेरणा अंततः स्वयं के विनाश का कारण बनती है। यह संकेत देता है कि परमेश्वर के नियमों से अवहेलना करने पर सत्ता, धन या शक्ति भी टिकाऊ नहीं रहती। साथ ही यह भी संकेत करता है कि अन्यायपूर्ण आचरण को स्थापित रखने वाले धीरे-धीरे अपनी ही नष्टि का बीजारोपण करते हैं।

क्रॉस-रेफरेंस और उनके तात्पर्य

  • यशायाह 10:5-7: शक्तिशाली के अहंकार के परिणामस्वरूप विनाश का संदेश — यह बताता है कि ऊँचे मन से किए गए आचरण के लिए दंड अवश्य आता है।
  • यहोशू 7:1-11: एक व्यक्तिगत आचरण के कारण समुदाय पर प्रभाव और देव-ग्रहणीय दंड।
  • रोमियों 2:6-8: कर्मों के अनुसार ईश्वर का प्रतिफल — अच्छाई के लिए जीवन, अन्याय के लिए कठोर परिणाम।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि अभिमान और अन्यायपूर्ण आचरण का पृथ्वी-परिणाम दिव्य न्याय के दायरे में आता है, और यह भी कि परमेश्वर का दायरा शांति और न्याय दोनों को संतुलित करता है।

विचारोन्मुख प्रश्न

  • हम अपने व्यवहार में कहाँ अभिमान या पलायनशीलता दिखाते हैं, और कैसे परमेश्वर के नियमों के अनुरूप सुधार संभव है?
  • हमारी नीति-निर्धारण और निर्णयों में क्या ऐसी प्रवृत्ति है जो सामाजिक शत्रुता को बढ़ाती है?
  • किस प्रकार से हम अपने जीवन में न्याय और दया के बीच संतुलन बनाए रख सकते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह यहेजकेल 25:15 हमें यह याद दिलाता है कि शत्रुतापूर्ण योजनाओं का अंत अक्सर स्वयं शत्रु की पक्षपात-युक्त धारणा से होता है। परमेश्वर के न्याय में अभिमान, नहीं बल्कि विनय और सत्य का राज चलता है। पलिश्तियों के प्रति यह निष्कर्ष यह भी संकेत देता है कि प्रभु की योजना में हर शक्ति और नीति एक समय-सारिणी के अनुसार काम करती है—जहाँ दुष्प्रेरणा पर सत्य-न्याय की परीक्षा होती है।

कथन-युक्त उद्धरण (फुटनोट)

यदि कोई संदेश-उद्धरण मिलता है, तो यह मुख्य पाठ से सीधे न हो कर प्रसिद्ध पब्लिक-डोमिन उद्धरणों के रूप में हो सकता है:

“क्योंकि पलिश्ती लोगों ने पलटा लिया, वरन् अपनी युग-युग की शत्रुता के कारण अपने मन के अभिमान से बदला लिया”—यह भाव यह दर्शाता है कि आत्म-निर्मित अभिमान और बदला लेने की प्रवृत्ति अंततः एक गहरी निंदा है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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क्योंकि परमेश्‍वर यहोवा यह कहता है : तुमने जो इस्राएल के देश के कारण ताली बजाई और नाचे, और अपने सारे मन के अभिमान से आनन्द किया,

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