Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 25:2 – आपत्तिजनक भविष्यवाणी: अम्मोनियों के विषय में
उच्चारणस्थ या स्थानिक संदर्भ ( Immediate Setting )
यहेजकेल की पुस्तक में सिर के पीछे यह संदेश आता है कि परमेश्वर_prophetic_ कृपा के साथ यहूदियों-के-विपरीतम_old साम्राज्यों के प्रति दृष्टि रखता है। यह passage अम्मोनियों के विरुद्ध भविष्यवाणी का द्वार खुलता है, जो पड़ोसी राष्ट्र के रूप में क्षेत्रीय तनाव और दुष्प्रभावों को इंगित करता है। यहोवा कहता है, हे मनुष्य के सन्तान, अम्मोनियों की ओर मुँह करके उनके विषय में भविष्यद्वाणी कर।
ईश्वर की उदारता और न्याय का संकेत
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर किसी राष्ट्र को अपने दायरे से बाहर नहीं मानते, भले ही वह शत्रु क्यों न हो। वे हर द्वेष और आक्रमण के बावजूद न्याय-व्रत रहते हैं—यदि एक राष्ट्र ने दूसरे के विरुद्ध धृष्टता दिखाई, तो उसकी गणना पर नज़र रखी जाती है। यहाँ अम्मोनियों के लिए एक विशेष वक्तव्य है, जो यह दर्शाता है कि प्रभु की योजना राष्ट्रों के साथ कैसे चलती है: उनके दमन, दमन से भरपूर स्थिति, या दुष्कर्म के फल को लेकर परमेश्वर निर्णय लेते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टता
अन्य प्रस्थान-ग्रंथों के साथ सम्बद्ध विचार
यह भविष्यवाणी, जबकि विशिष्ट रूप से अम्मोनियों के लिए है, समान संदेश देती है जिसकी प्रतिध्वनि अन्य पड़ोसी राष्ट्रों के विरुद्ध भी मिलती है—परमेश्वर के न्याय और उसकी योजनाओं के घोषणात्मक स्वर को।
क्रॉस-रेफरेंसे (Cross-References) और उनके संक्षिप्त विचार
इन संदर्भों में तात्पर्य यह है कि परमेश्वर तत्कालीन राजनीतिक-धार्मिक संयोजन से उठे खतरे को देख रहे हैं और उनके निर्णय इतिहास में अंकित होंगे।
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
हम यह सीख लेते हैं कि परमेश्वर के राज्य के हित में कभी-कभी हमें अस्थिर पड़ावों में भी विश्वास बनाए रखना है। अन्याय-चालों के विरुद्ध सच बोलना और अपनी आस्थाओं को मजबूत रखना, चाहे परिणाम कैसे भी हों, ईश्वर के प्रति हमारी आस्था का माप है। यह सुनिश्चित करें कि हम अपने समाज के भीतर दयालु, निष्पक्ष और नैतिक निर्णय लें, ताकि हमारा जीवन परमेश्वर की भलाई को दर्शाए।
संक्षिप्त संग्रहीत सार
यहेजकेल 25:2 में परमेश्वर एक पड़ोसी राष्ट्र—अम्मोनियों के विरुद्ध भविष्यवाणी के उद्घोष से न केवल उनकी भूमिका स्पष्ट करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि न्याय और दया की दिव्य योजना किसी भी सीमा से ऊपर है। यह संदेश न केवल उस काल के लिए, बल्कि आज भी नेतृत्त्व, सामाजिक व्यवहार और नैतिकता के लिए प्रतिध्वनित है।