Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 3:5—सीधा अर्थ परिभाषा
यह वाक्य स्पष्ट करता है कि परमेश्वर ने Ezekiel को "अनोखी बोली" या कठिन भाषावाली जाति के पास नहीं, बल्कि इस्राएल के घराने के पास भेजने का उद्देश्य रखा है। सरल शब्दों में: उसका रचनात्मक उद्देश्य यह था कि यह संदेश उन लोगों तक पहुँचे जिन्हें ईश्वर के साथ सीधा अनुबंध और स्पष्ट ज्ञान की आवश्यकता है; यह परमेश्वर की दृष्टि से एक विशिष्ट और लक्षित प्रेरणा है, ताकि उक्त समुदाय में जागृति हो सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोशू-नियम के बाद यहेजकेल का कार्य यहूदियों के समूह में एक विशेष भूमिका निभाने के लिए है: उन्हें अपनी अपनी गवाही को अपने घराने के भीतर स्थापित करने के लिए कहा गया था। यहाँ “इरिएवल” का मतलब यह नहीं कि दूसरे देशों के लिए कोई कर्तव्य नहीं था, बल्कि Ezekiel को भेजने का भी उद्देश्य उनके समाज के भीतर परिवर्तन करना था ताकि परमेश्वर का संदेश सशक्त सीधे पहुँचे।
interpreting observations
मुख्य विचार
संबद्ध संदर्भ
– यशायाह और यिर्मयाह के संदेशों में भी परमेश्वर ने संदेशवाहकों को सीधे अपने लोग के बीच भेजने का निर्देश दिया है ताकि प्रत्यक्ष प्रभाव संभव हो।
– यहेजकेल की अपनी पुस्तक में भी समुदाय के साथ संबंध और कर्तव्य-निष्ठा प्रमुख विषय हैं; परमेश्वर की संवादी चुप्पी और प्रतीक्षा का संतुलन दिखता है।
Cross-reference 1: अन्य लोग जो सीधे अपनी भविष्यवाणी-योजना के साथ अपने समाज के साथ जुड़ते हैं—इसका तात्पर्य यह है कि ईश्वर का संदेश स्थानीय संबंधों के भीतर प्रभावी होता है।
Cross-reference 2: मंत्री-कार्य और घराने के रिश्ते—परमेश्वर की योजना में परिवार-स्तर पर भी उत्तरदायित्व है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
ईश्वर के बुलावे में व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों पहलू होते हैं: हर बुलावा अपने समय और स्थान पर सत्य होता है। जो लोग ईश्वर के संदेश को फैलाते हैं, उन्हें अपनी स्थानीय स्थितियों से गहरे जुड़ाव बनाए रखना चाहिए ताकि परिस्थिति के अनुसार गवाही सजीव हो सके।
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