Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 4:17 पर commentary — भोजन और सुरक्षा की कमी से भय का आना
यह पद यहेजकेल के दुष्कालारोपण के प्रतीकात्मक भाग का भाग है, जहां परमेश्वर यहूदियों के आचरण और दुष्कर्मों के परिणामस्वरूप उनके समाजिक-आर्थिक संकट का संकेत दे रहे हैं। यह संदेश संदेश देता है कि पाप सिर्फ व्यक्तिगत दोष नहीं; यह संस्थागत व्यवस्था, खतरे के समय में सुरक्षा, और परिवारों के जीते-जी मर्यादा के लिए भी खतरा बन सकता है।
प्राकृतिक संदर्भ और मूल मतलब
पाठ टेक्स्ट के अनुसार भगवान आने वाले दण्ड की पूर्व-संकेतना दे रहे हैं: रोटियाँ और पानी की कमी से लोग थकेंगे, दहशत में होंगे, और अपने अधर्म से जुड़े परिणामों के कारण सूख-चुके होंगे। यहेजकेल की दृष्टि में यह आक्रमण, विनाश और अस्थिरता का चित्र है जो दुष्कर्म की दीर्घकालिक पहचान को दिखाता है। यह सीधे आस-पास की आपदाओं, रोग-आप्रतिष्ठाओं और सामाजिक विद्रोहों की ओर इशारा करता है, जो तब के लोगों के लिए स्पष्ट चेतावनी थीं कि ईश्वर के आदेशों से विमुख होने पर जीवन-यापन कठिन और असुरक्षित हो जाता है।
मुख्य संदेश
इस verse का तात्पर्य है कि दुष्कर्म के परिणाम केवल आंतरिक दोष नहीं, बल्कि बाहरी कमी-खामी और सामाजिक संकट में बदली हो जाते हैं। अनाज, पानी जैसी बुनियादी चीजों की कमी से लोगों के जीवन-यापन में अस्थिरता आती है; भय बढ़ता है और आत्म-विश्वास घटता है। इसका संदेश है: पवित्र-नियत पर लौटना और परमेश्वर के आदेशों के अनुसार व्यवहार करना हमारी रक्षा और स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
पवित्र शास्त्र से जुड़े प्रभावी विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और उनका संक्षेप
1) यहेसकेल 5:12 — भोजन और जीवन-यापन की कमी से मिलने वाला दण्ड का क्रम स्पष्ट होता है, जहां परिणामीय संकट व्यक्तियों से समाज तक फैलता है।
2) यशायाह 33:6 — ज्ञान और भय परमेश्वर की कीर्ति बनाते हैं, और स्थिरता के लिए विश्वसनीय उपाय बताते हैं।
3) हबक्कूक 3:17-18 — परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, परमेश्वर के विश्वासयोग्यता के कारण शांति और आनंद संभव रहते हैं।
संक्षेप: ये संदर्भ एक साथ यह बताते हैं कि कठिन समय के बीच भी परमेश्वर का उद्देश्य परिवर्तन और धार्मिक-आचरण की पवित्रता है, न कि केवल बाहरी सुरक्षा।
संवेदना और devotional विचार
हमारे जीवन में भी समय-समय पर ऐसा अनुभव होता है कि आवश्यक साधनों की कमी, भय और असुरक्षा हमें घेरे रहते हैं। इस verse के माध्यम से सीख मिलती है कि वास्तविक सुरक्षा परमेश्वर के विश्वासपरक जीवन में है—जब हम अधर्म के रास्ते से लौटकर नम्रता, तितिक्षा और धैर्य के साथ आचरण करते हैं। याद रखें कि परमेश्वर दयालु है और वह हमारे नये आरम्भ के लिए फिर से अवसर देता है।
पक्का-भावना के साथ छोटा-सा कार्य
नीचे दी गई छोटी-सी नजीरें: हेन्री, Barnes, Clarke के पुराने टिप्पणीकारों के संकेतों से प्रेरित विचार समेकित करके हमने एक समेकित स्वर बनायाः यह संदेश पाप की पूर्णता नहीं, बल्कि परिवर्तन का निमंत्रण है; भय के समय भी ईश्वर एक स्थिर आश्रय हैं।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण: अगर किसी जगह Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के इस विषय पर उनके सरल वाक्यों के सीधे छोटे उद्धरण उपलब्ध हों, वे यहाँ आवश्यकतानुसार संकेतित होंगे।