Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 40:2 का अर्थ
यहेजकेल 40:2 में स्पष्ट किया गया है कि भविष्यद्रष्टा को दर्शन में परमेश्वर द्वारा लामहूँ-देश के भीतर एक ऊँचे पहाड़ पर ले जाया गया और वहाँ एक नगर का आकार दक्षिण दिशा में दिखाई दिया। यह न केवल भौगोलिक भ्रमण है, बल्कि एक दिव्य प्रत्यक्ष अनुभूति है जो यहूदियों के लिए भविष्य की व्यवस्था और पूर्ति की झलक देती है।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह अध्याय यरूशलेम के विनाश के बाद का समय है जब यहेजकेल को एक नई कृपा दी गई—यानी पवित्रता के मंदिर-निरूपण की रीति-रचना और भविष्य के मंदिर का दर्शन। दर्शन-यात्रा में एक ऊँचे पहाड़ पर खड़ा किया जाना वास्तव में भगवान की महिमा और व्यवस्था-निर्माण की गंभीरता को दर्शाता है। यह परमेश्वर के किए जाने वाले अद्भुत कार्यों के संकेत देता है: स्थान-निर्धारण, मापा गया निर्माण-कार्य और दायित्वों की पुनर्संरचना।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमैटिक सार
अन्य प्रासंगिक पद
1) यिर्मयाह 31:12-13 में ईश्वर के आशीषपूर्ण restoring की प्रतीकात्मक स्पष्टता मिलती है—यह दर्शाता है कि परमेश्वर का उद्देश्य समाज की सक्रिय पुनर्स्थापना है।
2) हबक्कुक 2:2-3 में दर्शन के लिखे जाने की समय-सारिणी पर बल है—यद्यपि समय लगे, परमेश्वर की योजना पूरी होगी।
3) प्रकाशन 21:22-26 से मिलती-जुलती दृश्य-उत्तोलकता: परमेश्वर के जय-घोष और नए विद्यमान नगर की महिमा जो भविष्य में पूर्ण होगी।
संक्षेपित व्यावहारिक Takeaway
यह पाठ हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के बीच पवित्रता, संरचना और दिशा-निर्देशन बनाये रखते हैं। हमारी व्यक्तिगत भक्ति, समुदाय-निर्माण और उद्देश्य की स्पष्टता के लिए परमेश्वर की योजनाओं पर निर्भर रहना चाहिए।]
Cross-References के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान बनावट से प्रेरित सामान्य विचार sare मिलते हैं; किसी इन में से किसी एक का प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं दिया गया है ताकि मूल पाठ की խորհनाओं पर नवीन प्रकाश डाला जा सके।