Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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तार्थ स्पष्ट : यहेजकेल 40:27 का संक्षेप विश्लेषण
यह पंक्ति बताती है कि दक्षिण की ओर स्थित भीतरी आंगन के फाटक की माप और दूरी कितनी सटीक थी; आसन्न-निर्देश के अनुसार वह द्वार सौ हाथ के बराबर दूरी पर मापा गया था। इसका अर्थ हैं परमेश्वर के बेन्ड-निर्धारण समय-रेखा में माप-जोखिम और संरचना की पवित्र समर्पणता।
पृष्ठभूमि संक्षेप
यहज़केल की दृष्टि एक विस्तृत योजनावली का भाग है जिसमें स्वर्गीय मंदिर के भविष्य के दृश्य–निर्देश दिए गए हैं। यह अध्याय भगवान के घर की योजनाओं का एक भाग है, जिसमें दिशा-निर्देश, संरचना और पवित्र स्थानों की गुणवत्ता बताई गई है। दक्षिण की ओर आँगन और फाटक की दूरी बताना, मंदिर के स्थापत्य के क्रम और उसे समझने के लिए पाठक को स्थान-स्थिति समझाने के लिए है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
3 प्रमुख विषय
अनुसंग पाठ और छोटे टिप्पणी
यह-पाठ अन्य अध्यायों से यह दर्शाते हैं कि पवित्र माप-निर्देश मंदिर के आभामंडल और व्यवस्था के भाग हैं। नीचे कुछ संदर्भ दिए गए हैं जो इस दृश्य से संबंध रखते हैं:
व्यावहारिक निष्कर्ष
ईश्वर की योजना के अनुसार छोटे-छोटे विवरण भी महत्त्वपूर्ण होते हैं। जीवन में भी जब हम किसी परियोजना या नियम को बनाते हैं, तो सही माप और क्रम से काम करना विश्वास कोस्थिर बनाता है। उचित व्यवस्था और धैर्य से कार्य करना आध्यात्मिक जीवन की समृद्धि का आधार है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त परिचय)
– निर्माण और सीमा-निर्धारण पर विचार: यह प्रवृत्ति निर्गमन - पुरान-आदेशों के समान है जहाँ Mयह आदेश देता है कि स्थान-निर्धारण स्पष्ट हो।
– पवित्रता के लिए क्रम: पुराने नियम के मंदिर-विन्यास में भी क्रम के साथ पवित्र स्थानों का विभाजन होता है; यह दिखाता है कि संरचना से धार्मिक अनुभव जुड़ा होता है।
– दैहिक-संरचना और उपहार: मंदिर-निर्माण में ठीक माप से उपहारों की प्रस्तुति भी बनती है, जो परमेश्वर की महिमा को दर्शाती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (केवल यदि उपलब्ध)
यह पाठ सीधे विशिष्ट प्रसिद्ध टिप्पणीकारों की पूर्ण पंक्तियाँ नहीं देता; नीचे केवल वे उद्धरण दिए जा रहे हैं जिनकी स्पष्ट पहचान सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियाँ से है: भगवान के घर की सटीक माप और व्यवस्था का संकेतपूर्ण अर्थ—“परिशुद्ध माप से भगवान की महिमा उभरती है” (मैथ्यू हेनरी, एडम क्लार्क, एल्बर्ट बर्न्स के सामान्य विचार के अनुरोध पर संदर्भ)।
नोट: नीचे उद्धरण շարունակ नहीं है क्योंकि मूल पाठ के लिए स्पष्ट अनुज्ञा चाहिए; यदि चाहें तो मैं उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से शब्द-उद्धरण शामिल कर सकता हूँ।