Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 45:22 के लिए हिन्दी टिप्पणी (HINIRV)
घटना का तुरंत संदर्भ और पंक्ति का स्थान
यहहेजे़ल 45 अध्याय प्रार्थना-योजना और नये व्यवस्थात्मक निर्देशों के सन्दर्भ में ज्योतिर्मय कानून-आचरण का वर्णन करता है। 45:22 कहता है: “उस दिन प्रधान अपने और प्रजा के सब लोगों के निमित्त एक बछड़ा पापबलि के लिये तैयार करे।” यह पंक्ति प्रागैतिहासिक पवित्रता-यज्ञ और सामाजिक-राजसी व्यवस्था की समग्र योजना को स्पष्ट करती है: एक विशेष दिन पर राज्य के अधिकारी and प्रजा के लिए पाप-बलि का विधान, ताकि सतही पवित्रता के साथ-साथ आंतरिक परिवर्तन भी सुनिश्चित हो सके।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है
यह verse दिखाता है कि परमेश्वर हरित व्यवस्था में व्यवस्था-नियम, शिक्षा और दायित्वों के माध्यम से देश के नेताओं को भी जवाबदेह बनाते हैं। पापबलि की व्यवस्था सामाजिक और राजनीतिक जीवन के भीतर अपराध-निवारण और पवित्रता के लिए है, ताकि चूक के समय भी राष्ट्र-समाज न्यायपूर्ण और श्रद्धामय रहे। यह धार्मिक-नियमों के साथ नैतिक जवाबदेही की भी बात करता है—राज्य और समाज मिलकर पवित्रता को बनाए रखें।
प्रमुख शब्दों और प्रतिमाओं की स्पष्टीकरण
अन्य अभिलेख/सम्वन्धीय आयतें
यह भाग पुराने नियम में पाप-बलि के व्यापक प्रयोग और सामाजिक-न्याय के आलोक में आता है, जहाँ नेताओं के लिए विशेष प्रणालियाँ स्थापित थीं: उदाहरण के लिए पुराकथन में पाप-बलि और दायित्व-बलि के नियम। साथ ही यह विचार देता है कि दायित्व-पालन और पवित्रता की परंपरा कैसे सामाजिक-नैतिक जीवन को स्थिर बनाती है।
प्रयोग-आज का अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में यह verse सरकार-नेताओं और समुदाय के लिए एक स्मरण है कि आध्यात्मिक-आचार-व्यवस्था केवल व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक नैतिकता और न्याय के अभ्यास का हिस्सा है। नेतृत्व अपनी जिम्मेदारियों के साथ पवित्रता के मानदंड बनाये रखें—एक समुदाय के लिए शुद्धता का आचरण, प्रार्थना के साथ कानून-प्रयोग, और जरूरतमंदों के लिए न्याय-संरचना।
कथन-सार और सुसंगत संकेत
यहहेजे़ल 45:22 हमें याद दिलाता है कि पवित्रस्थान और शासन-व्यवस्था एक दूसरे के पूरक हैं। सरकारें और धार्मिक-उपाधियाँ मिलकर एक समाज को पवित्रता के मार्ग पर चलाने के लिए आवश्यक कार्रवाइयाँ तय करते हैं—ताकि पाप की प्रवृत्ति रोकी जाए और दायित्वपूर्ण नागरिकता बनी रहे।
छोटी cross-references और उनके सार (संक्षेप)
• यिर्मयाह 31:31-34— नये नियम के आर्कषण और हृदय-परिवर्तन की अपेक्षा। समझें कि आहत आत्मा ही पूजा की प्रेरणा बनती है।
•lés3:7-11 (उद्धृत नहीं किया गया पाठ)— पवित्र व्यवस्था के पालन से समाज कैसे सुरक्षित रहता है।
• कन्प्रेम 12:12-13— बहुधर्मी समुदाय में एकता और उत्तरदायित्व का महत्त्व, जहाँ हर सदस्य का योगदान आवश्यक है।
निष्कर्ष रूप से, यह वाक्य दीर्घ काल की धार्मिक-राजनीतिक व्यवस्था का एक स्निपेट है जो बताता है कि पवित्रता एक समग्र जीवन-योजना है—राज्य, समाज और पूजा-संस्थाओं की सहकार्य से बनी हुई।