यहेजकेल 46:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अन्नबलि यह हो : अर्थात् मेढ़े के साथ एपा भर अन्न और भेड़ के बच्चों के साथ यथाशक्ति अन्न और एपा पीछे हीन भर तेल।

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यहेजकेल 46:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

यहेजकेल 46:5 पर टिप्पणी

इस verse में भक्तजन के क्षेत्र के भीतर दिये गये निर्देशों का दृढ़ संकेत मिलता है कि पवित्र व्यवस्था के अनुसार आहुति और आहार के परिमाणों को कैसे नियंत्रित किया जाएगा। यहेजकेल के समय इस प्राधान्य का उद्देश्य यह था कि प्रशासनिक व्यवस्था स्पष्ट, उचित और पवित्र रूप से संचालित हो ताकि लोगों की भक्ति और समाज में व्यवस्था बनी रहे।

मुख्य बिंदु

यह verse अन्नबलि और भेड़-बच्चों की भेंट के मेल-जोड़े को निर्दिष्ट करता है: अन्न और तेल की मात्रा का निष्कर्ष यह दर्शाता है कि हर प्रकार की भेंट में संतुलन और विनम्रता आवश्यक है। कुल मिलाकर यह संदेश है कि परमेश्वर के अद्भुत उदाहरणों के सामने मानव का भाग एक-तिहाई नहीं, बल्कि समुचित और क्रमबद्ध होना चाहिए।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • सम्पन्नता बनाम समर्पण: सब कुछ एक निश्चित ढांचे में लौटना, ताकि आस्थावान लोग परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार अपने विनम्र समर्पण को प्रकट करें।
  • सन्तुलन और योजना: अन्नबलि और तेल के माप-जोड़े यह दिखाते हैं कि उपहारों में संतुलन महत्वपूर्ण है—यही जीवन के हर क्षेत्र में व्यवस्थित भोग के लिए आवश्यक है।
  • आहुति का महत्त्व: यह व्यवस्था-निर्देशHint देता है कि भेंट केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यवस्थित और विधिवत प्रस्तुत की जानी चाहिए।

प्रासंगिक संदर्भ

1) यहेजकेल 44–46 अध्यायों में पूर्व-पत्र के ठहराव और मंदिर-परिष्कार की योजनाओं से प्रेरित, जहाँ भाव और व्यवस्था एक साथ चलती है। यह दिखाता है कि औपचारिक क्रियाओं के भीतर भी भक्ति जीवित रहती है।

2) यशायाह 1:11–17 जैसा पाठ यह दिखाता है कि धार्मिक कर्म केवल दिखावे के लिए नहीं होते, बल्कि.Internal जीवन और न्याय के साथ जुड़ते हैं।

3) लुका 12:34 के समान विचार—जहाँ दिल की धारा वही भंडार बनती है, जिससे सामग्री की मात्रा नहीं, बल्कि हृदय की भक्ति प्रमुख रहती है।

व्यावहारिक विचार

नियमित साधना के समय हमें अपने offerings में अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। यह verse提醒 हमें सिखाता है कि पवित्र गतिविधियाँ केवल भावुकता नहीं, बल्कि सही क्रम और स्पष्ट उद्देश्य के साथ होनी चाहिए—ताकि हमारा समर्पण परमेश्वर की महिमा के लिए स्पष्ट और प्रभावी हो।

संक्षिप्त समापन

यहेजकेल 46:5 भगवान के सामने समर्पण के उचित क्रम की याद दिलाता है। अन्नबलि और तेल के साथ जो संकेत मिलता है वह यह है कि आहुति और सेवा एक व्यवस्थित जीवन की संरचना का हिस्सा हैं—जहाँ Praises और offerings मिलकर एक निष्कलंक और दयालु आचरण बनाते हैं।

ऊपर्युक्त उद्धरण (संकेतितैन)

इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट पाठों के छोटे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, पर उनके विचार इस प्रकार हैं: एक संतुलित, अनुशासित आहुति की महत्ता; भक्ति के साथ व्यवस्थित जीवन की आवश्यकता; और मंदिर में व्यवस्था-निर्देशों के साथ मानसिक रीति-रिवाज का महत्व. यदि चाहें, तो मैं उनके पूर्ण परिशिष्ट विचारों के संक्षेप या विशिष्ट टिप्पणियाँ संकलित कर सकता/सकती हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यहेजकेल 46:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यहेजकेल 45:24 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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हर एक बछड़े और मेढ़े के साथ वह एपा भर अन्नबलि, और एपा पीछे हीन भर तेल तैयार करे।

यहेजकेल 46:7 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यहेजकेल 46:7 (HINIRV) »
बछड़े और मेढ़े दोनों के साथ वह एक-एक एपा अन्नबलि तैयार करे, और भेड़ के बच्चों के साथ यथाशक्ति अन्न, और एपा पीछे हीन भर तेल।

गिनती 28:12 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
गिनती 28:12 (HINIRV) »
और बछड़े के साथ तेल से सना हुआ एपा का तीन दसवाँ अंश मैदा, और उस एक मेढ़े के साथ तेल से सना हुआ एपा का दो दसवाँ अंश मैदा;

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