Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48



यहेजकेल 6:3 पर टिप्पणी — संदर्भ में प्रवेश
यहोवा के संदेशक यहेजकेल के समय इज़राइल के अशांत नीतिगत और आध्यात्मिक पतन के बीच यह वचन देता है कि परमेश्वर की तलवार और निर्णय पृथ्वी के हर भाग पर पड़ेगा—पहाड़ों, नालों, और तराइयों सहित जिन जगहों पर वे पूजा के ऊँचे स्थान बनाकर आत्म-विश्वास लेते थे। यह स्पष्ट संकेत है कि पूजा-स्थलों की बाहरीता और अस्थाई धार्मिकता परमेश्वर के न्याय से मुक्त नहीं है; उसका उद्देश्य पथभ्रष्टता का परिणाम दिखाना है ताकि लोग फर्क करें और लौटें।
मुख्य अर्थ
वचन के केंद्र में यह है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के भीतर समाहित पथभ्रष्टता को एक ठोस चेतावनी के रूप में दिखाता है। पहाड़ों पर उनके ऊँचे-ऊँचे स्थान—जहाँ वे पूजना और बलिदान करते थे—उनकी विश्वसनीयता के बजाय उनके पतन का कारण बन सकते थे यदि उन जगहों पर दिल अधर्म and आत्मा-विश्वास गायब हो। धारणा है: बाह्य पूजा-अनुष्ठान से अधिक आवश्यक है—हृदय की निष्ठा और नैतिक जीवन.
तीन प्रमुख विषय
गुणवच्चित अन्य संदर्भ (Cross-references)
- अन्याय के कारण राष्ट्रीय चटपटे परिणामों के बारे में समान चेतावनी: ה—for instance, यह चेतावनी जंगल/स्थानों के विरुद्ध है, ताकि लोग एकात्मता से लौटें।
- आंतरिक परिवर्तन के महत्व की पुष्टि: बाहरी धार्मिक कर्म से पहले मन में नया दिल चाहिए।
- उद्धार और लौटना: परमेश्वर के दयालु नाटक में भय के साथ भविष्य की आशा बनी रहती है कि यदि लोग प्रतिवेदन सुनकर लौटते हैं, तो वह कर्तेय बनेंगे।
कथन-उद्धार और विचार
जैसी यहेजकेल का संदेश है, परमेश्वर अपने लोगों के उन स्थानों और प्रतीकों से भी वाकिफ है जिनमें वे आराम पाते हैं। यह एक कठिन लेकिन स्थापित सच है: धार्मिक प्रतीकों की अस्थिरता तब उजागर होती है जब योग्यता के मूल में नैतिकता, प्रेम और सच्चाई न हो। इस दृष्टि से आधुनिक जीवन में भी हमें याद दिलाया गया है कि आराधना-संसार के बीच एकात्मता आवश्यक है—वह तब संभव है जब व्यक्ति अपने हृदय को परमेश्वर के सामने खोल दे और व्यवहारिक पवित्रता अपनाए।
संक्षिप्त समापन
यहेजकेल 6:3 बताता है कि प्रभु अपने लोगों के शयन-स्थलों पर भी नजर रखता है और बाहरी पूजा के साथ आत्म-निष्ठा की कमी पर तलवार चलाने के लिये तैयार रहता है। परन्तु यह चेतावनी एक अवसर है—अंदर से परिवर्तन कर, निष्ठा और नम्रता के साथ परमेश्वर के मार्ग पर लौटना संभव है।
संक्षिप्त अनुप्रयोग
नोट: इस प्रवचन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से समेकित विचार संजोए गए हैं; विशिष्ट उद्धरण आवश्यक स्थानों पर संक्षेप रूप में शामिल हैं।