Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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अय्यूब 24:5 — संदर्भिक स्थिति और पाठ का परिचय
पद में दीन-हीन लोगों के कठिन जीवन और उनके दिनोंदिन काम की अनिश्चित स्थिति का चित्रण है। अय्यूब उद्धृत करने वाले इन युगलों में उन लोगों की दैनंदिन चेन की बात कर रहा है जो जंगल-जंगल घूमकर खाने की तलाश करते हैं और उनके बच्चों के लिए भोजन जंगल से ही मिल पाता है। यह दृश्य एक कठोर, परन्तु वास्तविक सामाजिक पक्ष दिखाता है— धनी-वैभव के बावजूद जीवन के कठोर सच किन परिस्थितियों में आते हैं।
पाठ से ईश्वर और विश्वास के बारे में जो स्पष्ट होता है
यह पाठ यह संकेत देता है कि ईश्वर सब कुछ नियंत्रित करते हैं, पर मानव जाति की गरीबी, अन्याय और भोलापन समाज के भीतर व्यापक रूप से विद्यमान है। दीनजनो की माँग और समय पर भोजन की अनुपलब्धता यह दिखाती है कि परमेश्वर के न्याय के सामने सभी वर्ग बराबर नहीं रहते; परन्तु पवित्र धर्मशास्त्र में यह भी है कि दीन-हीन पर दृष्टि रहती है तथा वे भी परमेश्वर की देखरेख में हैं।
शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य संदर्भ और उद्धरण
इस दृश्य से मिलते-जुलते विचार पवित्र ग्रंथ के अन्य भागों में भी आते हैं— नीतियों-न्याय की कमी के बीच ईश्वर के देखरेख की स्मृति; मजदूरों की मजदूरी के साथ उनका दायित्व; और कठोर परिस्थितियों में भी ईश्वर के सत्य पर अ टूट विश्वास।
Related cross-references (संक्षेप):
क्या यह पाठ आज के जीवन के लिए कहता है?
आज भी अनेक लोग आर्थिक तंगी, रोजगार की कमी और असमानताओं से जूझते रहते हैं। इस पाठ से हमारी शिक्षा यह है कि हम समाज के दीन-हीनों के प्रति संवेदना रखें, उनकी सहायता के उपाय खोजें और प्रभु पर भरोसा रखें कि वह विहित मार्ग दिखाते हैं। इससे सामाजिक न्याय का निर्माण संभव होता है— न कि केवल दुनिया भर को संकेत देना, बल्कि वास्तविक सहायता के नयी राहें बनना।
संक्षेप टिप्पणी — एकीकृत संदेश
इस अभिलेख में दीन-हीनों की जीविका के लिए निरंतर प्रयत्न और भोजन की तलाश का चित्र बनता है। यह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के विद्युत-न्याय के भीतर भी वह दीन-हीन लोगों के लिए समर्थ और करुणा-शील है। पुराने शास्त्रों के मान्य विचारों के साथ मारक-उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) से मिला-जुला निष्कर्ष यह है कि दीनता के बीच भी विश्वास की दीप्ति और दया की राह खोली जाए।
उद्धरण नोट: इस संकलन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे-से उद्धरणों को आवश्यकतानुसार मंजूरी के साथ शामिल किया गया है— यदि उपलब्ध हों, वे पाठ के अनुरूप संचारित किये जाते हैं।