Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42Verse
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अय्यूब 24:12 — पाठ का तात्पर्य और संदर्भ
यह पद अय्यूब के कठिन प्रसंग में है, जहाँ संसार की अन्यायपूर्ण घटना-घटना हमारे सामने खुलकर आती हैं। नगर के भीतर कराह और घायलों की दशा बताती है कि अकाल, हिंसा और अन्याय सामान्य हैं, परन्तु परमेश्वर का न्याय हर स्थिति पर तुरंत नहीं दिखता। इस पंक्ति में यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि परमेश्वर मूर्खता का हिसाब नहीं लेता—यानी देहना, सुझाव-सम्बन्धी चतुराई या शत्रुतापूर्ण पाखंड से उसे काम नहीं चलता। परमेश्वर के दिव्य नियम और न्याय की स्थिरता यहाँ केंद्र में है, भले ही मनुष्यों की आँखों से स्थितियाँ विपरीत दिखाई दें।
पाठ से निकलती उक्ति: परमेश्वर की नीयत और विश्वास
1) परमेश्वर मूर्खता का हिसाब नहीं लेता: इसका मतलब है कि वह मानवीय चतुराई, दिखावटी धार्मिकता या अन्यायपूर्ण तर्कों पर निर्णय नहीं करता। उसका न्याय सत्य, दया और नैतिक स्पष्टता पर टिका रहता है।
2) कठिन समय में भी न्याय की प्रतीक्षा: इस verse में वेदना और चिंता के बीच भी परमेश्वर के नियम और सीमा स्पष्ट रहते हैं। हमें धैर्य के साथ सत्य पर टिके रहना चाहिए, भले ही परिणाम अभी दिखाई नहीं दे रहे हों।
कुंजी शब्द और चित्र
अन्याय और ईश्वर की न्याय-योजना: सहायक संदर्भ
• भजनों के स्थिर विश्वास की प्रवृत्ति (उद्धृत नहीं किया गया पाठ) दर्शाते हैं कि विश्वासियों को कठिन समय में भी ईश्वर के सभ्य नियमों पर टिके रहने की प्रेरणा मिलती है।
• अन्याय के विषय पर दावों की गहराई: परमेश्वर न्यायपूर्ण हैं और समय आने पर यह सत्य दिखेगा, यह विश्वास दिलाता है कि धरती पर दुख के बावजूद अंततः एक योजना है।
आज के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
टिप्पणी-संदर्भ: संक्षिप्त मिलान
यह वाक्य अन्य न्याय-घटना के साथ संगत है जहां ईश्वर की दृष्टि मूल्यांकन के मानदंडों से ऊपर है। यह पाठ अन्याय के बीच भी ईश्वर की निर्भरता और नैतिक कानून के दृढ़ रहने का स्मरण कराता है।
cross-references
1) निर्गमन 23:7 — न्याय के बिना किसी पर दोष नहीं; 2) भजन 36:9 — ज्ञान के स्रोत में प्रकाश है; 3) इब्रानियों 10:37 — सत्य का समय आकर रहता है।
अंतिम सार: इस verse में हम परमेश्वर की परिपक्व नैतिकता और न्याय की सत्यता को देखते हैं—यद्यपि संसार में कराह और चोट है, परमेश्वर मूर्खता का हिसाब नहीं लेता; उसका न्याय सत्य, धैर्य और करुणा के साथ चलता है।