Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
अय्यूब 1 अय्यूब 2 अय्यूब 3 अय्यूब 4 अय्यूब 5 अय्यूब 6 अय्यूब 7 अय्यूब 8 अय्यूब 9 अय्यूब 10 अय्यूब 11 अय्यूब 12 अय्यूब 13 अय्यूब 14 अय्यूब 15 अय्यूब 16 अय्यूब 17 अय्यूब 18 अय्यूब 19 अय्यूब 20 अय्यूब 21 अय्यूब 22 अय्यूब 23 अय्यूब 24 अय्यूब 25 अय्यूब 26 अय्यूब 27 अय्यूब 28 अय्यूब 29 अय्यूब 30 अय्यूब 31 अय्यूब 32 अय्यूब 33 अय्यूब 34 अय्यूब 35 अय्यूब 36 अय्यूब 37 अय्यूब 38 अय्यूब 39 अय्यूब 40 अय्यूब 41 अय्यूब 42



अय्यूब 25:3—कौन है जिस पर उसकी प्रकाश नहीं पड़ता?
इस पद में अपेक्षित पंक्ति एक ध्वनिमय प्रश्न के रूप में आती है: परमेश्वर की महिमा और परम सत्ता का स्पष्ट संकेत है कि उसकी सेनाओं की गिनती तो हो सकती है, पर उसकी ज्योति, उसकी पराकाष्ठा और उसकी न्यायपूर्ण शासन के प्रकाश से फिर भी हर चीज आच्छादित रहती है। यह यूं कहता है कि सारे ब्रह्मांड में ईश्वर की सत्ता की पहुँच से परे कुछ भी नहीं है; वह हर जगह है और हर वस्तु वही देख सकता है।
मुख्य अर्थ
पद की केंद्रीय बात यह है कि परमेश्वर की महिमा की व्यापकता मानव की कल्पना से भी ऊपर है। “उसकी सेनाओं की गिनती हो सकती है” यह दर्शाता है कि उसकी शक्ति एक सुव्यवस्थित, क्रमबद्ध व्यवस्था में है; किन्तु “कौन है जिस पर उसका प्रकाश नहीं पड़ता” से संकेत मिलता है कि उसकी ओज, तेज और आधिकारिक अस्तित्व सर्वत्र है, कोई जगह नहीं जहाँ उसका प्रकाश नहीं पहुँचे।
कुंजियाँ/themes
अन्य आयतों द्वारा संबंध
– उत्पत्ति 1:3 में कहा गया कि परमेश्वर ने प्रकाश बनाए और वह प्रकाश से जोड़ा गया—यह भी उसी प्रकाश की व्यापकता को दर्शाता है।
– दानियाल 2:22-23, 44–45: परमेश्वर हर चीज को जानता है और उसकी सत्ता विश्व-राज्य में स्थिर है; ज्ञान की आकाशगंगा उसकी रचना और निर्णयों में स्पष्ट है।
– प्राचीन विश्वासियों के गीतों में भी “उसकी ज्योति से सबकुछ प्रकाशित होता है” जैसा भाव है।
व्यावहारिक विचार
हम इस पद से सीखते हैं कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में अंधकार और छुपाव के स्थान नहीं हैं। हमें आत्म-न्याय, पवित्रता और सत्य के प्रकाश को स्वीकारना चाहिए, क्योंकि प्रभु की प्रकाश-यात्रा संपूर्ण जगत के लिए निर्देश है।जब हम परिस्थिति के तर्क से परे उसकी उपस्थिति को महसूस करते हैं, तब हमारी आस्था स्थिर होती है और हम सच्चे निर्णय लेते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
अय्यूब 25:3 हर उस चीज को रेखांकित करता है जो परमेश्वर के प्रकाश-प्रभाव एवं सत्ता के दायरे से बाहर नहीं है। वह सर्वज्ञ, सर्वमहत्वावान हैं; हमारे लिए यही आश्वासन है कि जीवन के हर अंधेरे में भी उसका प्रकाश समान रहता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (अर्थात्): इस अंश में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक छोटे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, पर उनके विचार इस प्रकाश-पंक्ति के अनुरूप हैं: परमेश्वर की महिमा और उसकी ठोस सत्ता हर चीज़ पर हावी है; उसकी ज्योति लगभग सभी वस्तुओं को प्रकाशित करती है।