अय्यूब 25:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“प्रभुता करना और डराना यह उसी का काम है*; वह अपने ऊँचे-ऊँचे स्थानों में शान्ति रखता है।

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अय्यूब 25:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

अय्यूब 25:2 — उद्धारक मंडन? परमेश्वर की प्रभुता और शान्ति

प्रारम्भिक संदर्भ: अय्यूब 25章 में दिनेश कदाचार पर टिप्पणी चल रही है; लेकिन इस अध्याय का छोटा-पंक्ति उद्धरण—“प्रभुता करना और डराना यह उसी का काम है; वह अपने ऊँचे-ऊँचे स्थानों में शान्ति रखता है”—परमेश्वर की सर्वोच्च अधिकार-प्रतिष्ठा और उसकी शान्ति के संरक्षण की बात दर्शाता है। यह आयत सीधे तौर पर दीन-हीनता और परमेश्वर की महानता के बीच संतुलन दिखाती है: प्रभुत्व उसी का है और उसकी पवित्र शास्त्र-निष्ठा में भय और श्रद्धा भी शामिल है।

ईश्वर का स्वरूप और उसकी आस्था

यह छंद यह बताता है कि प्रभुता और डर—यानी परमेश्वर की महानता से श्रद्धाभाव—उसके कामों का हिस्सा हैं। परमेश्वर अपने उच्च स्थानों में शान्ति बनाए रखता है, इसका संकेत है कि स्वर्ग का राज्य न किसी भय या अराजकता से नहीं, बल्कि संहति और व्यवस्था से चलता है। यह विचार एक संतुलित धारणा देता है: परमेश्वर के भय के साथ जीवन जीना ही सत्य-जीवन है; उसे मानना और उसकी शान्ति में विश्राम करना मानव-जीवन के लिए अनिवार्य है।

शब्दों के पीछे का अर्थ

प्रभुता करना (prabhuta karna)—यहां परमेश्वर की सत्ता और अधिकार का संकेत है, जिससे सारे तथ्य बनते हैं। डराना (darāna)—यह भक्ति और सम्मान का चरितार्थ रूप है; नहीं-तो डर एक दर्दनाक अनुभूति बन सकता है, परन्तु यहाँ यह सम्मान और पवित्रता के अनुराग का भाव है। ऊँचे-ऊँचे स्थानों में शान्ति रखना—स्वर्गीय सत्ता का स्थिर और समृद्ध निवास—जहाँ परमेश्वर अपनी स्थिति से समाज और लोग दोनों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

अन्य संदर्भों से सम्बन्ध

  • स्तोतपत्र 46:11 और 97:1 में परमेश्वर की उपस्थिति और शान्ति का बखान है—जहाँ उसका राज्य शान्ति और सुरक्षा का स्रोत बनता है।
  • यशायाह 6:3 में पवित्रता और प्रभुत्व के स्वरूप का वर्णन है—स्वर्गीय रंग में जिसकी महिमा चारों ओर फैली है।
  • रोमियों 11:36 में, सब कुछ उसी से होकर जाता है—उसकी सत्ता और उसकी शान्ति का सार्वभौमिक आदेश स्पष्ट होता है।

ये Cross-References परमेश्वर की सत्ता, पवित्रता, और शान्ति के एक ही धागे को दर्शाते हैं—कि हमारा जीवन उसका भय और उसकी शांति के अनुरूपी हो।

पवित्र-जीवन पर आज का प्रभाव

आज के संकटपूर्ण समय में यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर की प्रभुता की मान्यता और उसकी शान्ति में विश्राम प्राप्त करना एक ही दायरे में आता है। कठिनाइयों के बीच भी हमें यह विश्वास रखना चाहिए कि परमेश्वर का शासन स्थिर है और वह अपनी सुन्दर शान्ति रखे हुए है। इसलिए—

  • अपने भय को परमेश्वर के भय में बदलिए; भय-भावना समझदारी और आस्था का मिश्रण बने।
  • घनघोर परिस्थितियों में भी ईश्वर की सत्ता को याद रखिए और शान्ति की प्रार्थना बनाए रखें।
  • परिवार, समुदाय और संदेस के भीतर सत्कर्म और सम्मान को बनाए रखना यह भी परमेश्वर की शान्ति को फैलाने का एक भाग है।

संक्षिप्त सार

यद्यपि यह शास्त्रीय पाठ छोटा है, यह गहराई से प्रेरित करता है कि प्रभुता केवल अधिकार का नाम नहीं—बल्कि सही डर और शान्ति से संचालित जीवन का मार्ग है। परमेश्वर का उच्च स्थानों में शान्ति रखना और हमारे भीतर भी उसकी आस्था को जागृत रखना, विश्वास की यात्रा का मूल मंत्र है।

एक-दो परिचित उद्धरण (सीमित उद्धरण के लिए)

Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-domain टिप्पणी में सबसे छोटे उद्धरण केवल तात्कालिक पंक्तियों तक सीमित रूप से उद्धृत हैं और पूर्ण पाठ नहीं दिए जाते। यदि चाहें, मैं उनके विचारों के सार को संक्षेप में समाहित कर सकता/सकती हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 25:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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