अय्यूब 27:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर न करे कि मैं तुम लोगों को सच्चा ठहराऊँ, जब तक मेरा प्राण न छूटे तब तक मैं अपनी खराई से न हटूँगा।

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अय्यूब 27:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

Reader-friendly overview

अय्यूब 27 में हमने अय्यूब की दृढ़ता और उसकी धारणा पर दृष्टि डाली है कि उसकी ईमानदारी और भय की जिंदगी उसे अकसर भुगतनी पड़ी भिन्न-भिन्न समस्याओं के बीच भी अडिग रखेगी। अध्याय 27 का अंत में आता वह स्पष्ट कथन है जिसमें वह अपने चरित्र की सुरक्षा के प्रति दृढ़ है और यह भी कहता है कि परमेश्वर उसे सच्चा ठहराए या न ठहराए, उसका सत्य और खराई उसकी जीवन-शैली का केंद्र बना रहेगा। इस पाठ के जरिए हमें यह समझना है कि विश्वास की परीक्षा में धैर्य और नियम-पालन ने कैसे आत्म-संतुष्टि दी है, भले ही परिस्थिति चाहे कैसी भी हो।

Verse in its chapter

यह श्लोक अय्यूब के भाषण का भाग है जहाँ वह अपनी खराई (uprightness) और सत्य पर अडिग रहता है—“परमेश्वर न करे कि मैं तुम लोगों को सच्चा ठहराऊँ, जब तक मेरा प्राण न छूटे तब तक मैं अपनी खराई से न हटूँगा।” इसका आशय है कि वह अपने आचरण की साफ़-साफ़ाई और निष्ठा से समझौता नहीं करेगा, चाहे लोग उसे कैसे भी देखें या आलोचना करें।

Main spiritual lesson

मुख्य आध्यात्मिक पाठ यह है कि विश्वसनीय भगवान के सामने जीवन की ईमानदारी बनाकर रखना हमारी सबसे बड़ी वैचारिक और नैतिक प्रगति है। कठिन समय में भी सचाई व श्रद्धा को बनाए रखना—यह अय्यूब के अनुभव में आत्म-आत्म-निरीक्षण और विश्वास की गहराई को दर्शाता है। खराई का अभिप्राय सिर्फ बाहरी आचरण नहीं, बल्कि आंतरिक संकल्प और यह कि परमेश्वर के लिए हमारा जीवन एक अखंड प्रतिज्ञा बना रहे।

Cross-references and connections

  • नीतिवचन 10:9 — सत्य में चलना निर्भय आचरण देता है; फिर भी अगर घोल-घोल कर भी गलत समझ लिया जाए तो सत्यचित्त व्यक्ति चुप नहीं रहता, वह अपने आदर्श की रक्षा करता है।
  • नीतिवचन 12:19 — सच बोलना स्थायित्व और शांति देता है; कटु वचन से नहीं, पर सत्य और खराई से जीवन मजबूत होता है।
  • यशायाह 33:15-16 — जो दयालु और भयख़ुदा जीवन जीते हैं, वे स्थिरता और सुरक्षा पाएंगे; सत्य और ईमानदारी उनके भाग्य बन जाते हैं।

Practical application

1) आत्म-निरीक्षण: अपनी रोज़मर्रा की जीवन-शैली में यह पूछना—क्या मैं सच और खराई के मार्ग पर चल रहा हूँ? 2) आलोचनाओं का सामना: जब लोग मेरी पवित्रता पर प्रश्न उठाएं, तो मैं प्रेम से उत्तर दूँ, लेकिन अपने आचरण से समझ दूँ कि मेरा जीवन सत्य है। 3) विश्वास की स्थिरता: कठिन समय में भी परमेश्वर के प्रति दृढ़ विश्वास और खराई बनाए रखना ताकि भावनाओं के ऊँच-नीच में भी मेरा चरित्र बना रहे।

Brief synthesis

अय्यूब 27:5-6 एक स्पष्ट उद्घोष है—जब तक प्राण है, खराई पर अडिग रहना। यह पाठ आत्मिक दृढ़ता का प्रतीक है: सत्य के साथ जीना, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ प्रतिकूल क्यों न हों। यह हमें याद दिलाता है कि ईमानदारी और सत्य की कीमत कभी व्यर्थ नहीं जाती; परमेश्वर के सामने हमारी समर्पित जीवन-शैली ही वास्तविक ठहराव है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

अय्यूब 27:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“यदि मनुष्यों के बीच कोई झगड़ा हो, और वे न्याय करवाने के लिये न्यायियों के पास जाएँ, और वे उनका न्याय करें, तो निर्दोष को निर्दोष और दोषी को दोषी ठहराएँ।

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