Old Testament
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सीधे अर्थ की बात
सबसे ऊपर के गुण और न्याय के मानक से हटकर, परमशक्तिमान वह नहीं कर सकता जो अत्याचार या अन्याय को उचित ठहराए। यहीं केंद्रबिंदु है कि परमेश्वर अत्याचार नहीं कर सकता, क्योंकि उसकी पूर्ण धर्म और सही न्याय उसकी स्वभाव के अनुकूल है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
अय्यूब की किताब में परमेश्वर के कार्यों और मानवीय दृष्टिकोणों के बीच टीकाकरण है। यहाँ अय्यूब के मित्रों के तर्कों के विरुद्ध, परमेश्वर अपने कार्यों के पीछे की पवित्र न्यायता को स्पष्ट करते हैं। पद 37:23 में कहा गया है कि परमसत्तामान, “जो भेद हम पा नहीं सकते,” वह न्याय और पूर्ण धर्म को नहीं छोड़ सकता—यानी उसका स्वभाव निष्कपट और निष्कलंक है, और अन्याय उसकी प्रकृति नहीं है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- परमेश्वर की सीमा-रहित सामर्थ्य के बावजूद, उसकी चुनी हुई प्रकृति निष्कपट और न्यायपूर्ण है। जो कुछ भी कठिन या गूढ़ है, उसे भी वह सम्यक ज्ञान में जांच कर सही ठहराते हैं।
- “जो भेद हम पा नहीं सकते” से संकेत मिलता है कि मानवीय समझ सभी गूढ़ कारणों को नहीं भांप सकती; परमेश्वर के निर्णय उसके पूर्ण ज्ञान और समानता के भीतर हैं।
छोटे थीमैटिक बिंदु
संबंधित पद और उनके संक्षिप्त अर्थ
यशायाह 45:21— एक ऐसे देवता का परिचय जो न्याय करता है—यह बताता है कि परमेश्वर के निर्णय पूर्वाग्रह से मुक्त और साक्ष्य-परक होते हैं।
रोमियों 9:14-15— क्या निष्कर्ष सामने आता है कि परमेश्वर के चयन में इंसान की योग्यता का दृष्टिकोण मायने रखता है? नहीं; उसकी कृपा और न्याय के मानक सर्वोपरि हैं।
निर्गमन 34:6-7— दयालु और क्षमाशील परमेश्वर की प्रकृति को दर्शाते हैं; वह अन्याय को छोड़ देता है, पर दया और न्याय को समान रूप से बनाये रखता है।
अनुवादित विचारशील_observation
यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि कठिन घटनाओं के बीच भी ईश्वर का समान्य गुण—न्यायपूर्ण और पूर्ण धर्म—ही स्थिर रहता है। हमारी सीमा समझ में भेद संभव न होते हुए भी, परमेश्वर की विश्वसनीयता और सत्यता अचल है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम इस तथ्य को अपने जीवन में कैसे उतारें? प्रभु की सत्ता और न्याय के लिए धैर्य रखें; कठिन प्रश्नों में भी उसके मार्ग का सम्मान करें। अन्याय के बारे में आवाज उठाने की प्रेरणा मिले, पर यह भुलना न हो कि परमेश्वर अन्याय नहीं करता; वह हर स्थिति में सत्य और निष्कपट न्याय दिखाता है।
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सूक्ष्म cross-references
यशायाह 45:21 – न्यायपूर्ण परमेश्वर का परिचय देता है; रोम 9:14-15 — चयन के नियम और कृपा के स्वरूप; निर्गमन 34:6-7 — दया और न्याय का संतुलन।
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