Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 19:1 यूहन्ना 19:2 यूहन्ना 19:3 यूहन्ना 19:4 यूहन्ना 19:5 यूहन्ना 19:6 यूहन्ना 19:7 यूहन्ना 19:8 यूहन्ना 19:9 यूहन्ना 19:10 यूहन्ना 19:11 यूहन्ना 19:12 यूहन्ना 19:13 यूहन्ना 19:14 यूहन्ना 19:15 यूहन्ना 19:16 यूहन्ना 19:17 यूहन्ना 19:18 यूहन्ना 19:19 यूहन्ना 19:20 यूहन्ना 19:21 यूहन्ना 19:22 यूहन्ना 19:23 यूहन्ना 19:24 यूहन्ना 19:25 यूहन्ना 19:26 यूहन्ना 19:27 यूहन्ना 19:28 यूहन्ना 19:29 यूहन्ना 19:30 यूहन्ना 19:31 यूहन्ना 19:32 यूहन्ना 19:33 यूहन्ना 19:34 यूहन्ना 19:35 यूहन्ना 19:36 यूहन्ना 19:37 यूहन्ना 19:38 यूहन्ना 19:39 यूहन्ना 19:40 यूहन्ना 19:41 यूहन्ना 19:42



यूहन्ना 19:18 का संदर्भ और मतलब
यूहन्ना 19:18 में पवित्रु ने यीशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने के दृश्य का कोर प्रस्तुत किया है: उन्होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को। यह सूचक है कि क्रूस पर शारीरिक यातना के साथ-साथ परमेश्वर के पास आने का रास्ता, तीनों के लिए एक ही कारण से बन गया था: यीशु का कष्टपूर्ण बलिदान मानव पाप के लिए अनुकूलन था। यह कहानी यीशु के पूर्ण निष्ठावान बलिदान की याद दिलाती है, जिसमें वह निर्बलता और कष्टों के बीच भी परमेश्वर के उद्देश्य को पूरा कर रहा था।
मूल संदेश
यह दृष्य दिखाता है कि यीशु ने वैश्विक नजर से एक साथ तीन लोगों के लिए दूरी घटाई: दो चौरों पर—इधर-उधर—वही बीच में रहने वाला यीशु। उसकी स्थिति मानवीय दर्द का प्रतीक है, पर यह भी संकेत देता है कि उद्धार केवल एक जीवित व्यक्ति के द्वारा नहीं, बल्कि तीनों के बीच मध्यस्थ के रूप में यीशु का स्थान है: वह एकदम बीच में है और हर किसी की ओर दयानुभूतो के साथ पहुँच रहा है।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थ
यूहन्ना 12:32 का संदर्भ: उद्धारदाता की उपस्थिति और लोक-कार्यों के बीच की दूरी घटना—यानी विश्व की बहुधर्मिता के बीच भी यीशु स्वयं एक पुल है। इस्राइल के भीतर से आने वाले इन लोगों के लिए भी, और दूसरे समूहों के लिए भी, यीशु का देहधारी बलिदान एक सामान्य मार्ग बनता है।
रोमियों 3:23-25: सभी ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित रहे हैं; परन्तु यीशु के बलिदान से पाप का दंड दूर होता है और विश्वास से उद्धार मिलता है।
1 कुरिन्थियों 1:18: क्रूस पर मरण का संदेश संसार की foolishness नहीं, बल्कि प्रभु की शक्ति है—यही केन्द्र है।
व्यावहारिक विचार
हम कैसे अपने दर्द और कठिनाइयों में Christus को बीच में देखते हैं? जीवन की क्रूरता के समय भी हमें स्मरण रखना चाहिए कि यीशु ने बराबर दर्द उठा कर हमारा दुख टोपा है—वे हमारी ओर बढ़ते रहेंगे। प्रत्येक विश्वासी के लिए यह प्रश्न है: क्या मैं अपने दृश्य में यीशु को केन्द्र में रखकर, उसे अपने जीवन के संकटों का संदर्भ बनाता हूँ? अगर हाँ, तो मैं दूसरों के लिए पुल बन सकता हूँ—हमारी सहायता, संवेदना, और कल्याणकारी क्रियाओं के द्वारा।
संक्षिप्त सार
यूहन्ना 19:18 दर्शाता है कि यीशु क्रूस के मध्य में खड़ा होकर तीनों स्थितियों के लिए उद्धार का मार्ग बनाते हैं—यह परमेश्वर के प्रेम का शक्तिशाली संकेत है, जो दर्द के बीच भी मोक्ष का संदेश देता है।