Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 7:1 यूहन्ना 7:2 यूहन्ना 7:3 यूहन्ना 7:4 यूहन्ना 7:5 यूहन्ना 7:6 यूहन्ना 7:7 यूहन्ना 7:8 यूहन्ना 7:9 यूहन्ना 7:10 यूहन्ना 7:11 यूहन्ना 7:12 यूहन्ना 7:13 यूहन्ना 7:14 यूहन्ना 7:15 यूहन्ना 7:16 यूहन्ना 7:17 यूहन्ना 7:18 यूहन्ना 7:19 यूहन्ना 7:20 यूहन्ना 7:21 यूहन्ना 7:22 यूहन्ना 7:23 यूहन्ना 7:24 यूहन्ना 7:25 यूहन्ना 7:26 यूहन्ना 7:27 यूहन्ना 7:28 यूहन्ना 7:29 यूहन्ना 7:30 यूहन्ना 7:31 यूहन्ना 7:32 यूहन्ना 7:33 यूहन्ना 7:34 यूहन्ना 7:35 यूहन्ना 7:36 यूहन्ना 7:37 यूहन्ना 7:38 यूहन्ना 7:39 यूहन्ना 7:40 यूहन्ना 7:41 यूहन्ना 7:42 यूहन्ना 7:43 यूहन्ना 7:44 यूहन्ना 7:45 यूहन्ना 7:46 यूहन्ना 7:47 यूहन्ना 7:48 यूहन्ना 7:49 यूहन्ना 7:50 यूहन्ना 7:51 यूहन्ना 7:52 यूहन्ना 7:53



यूहन्ना 7:18 पर तत्काल संदर्भ
पद का क्षण-बंध: यह पाठ यूहन्ना के अनुसार यीशु के समय के धार्मिक नेताओं और जनता के बीच की बहस के संदर्भ में लिखा गया है, जहाँ लोग अपनी स्वतः की मान्यता और अधिकार से अपनी बातें पढ़ाते हैं। यीशु यह स्पष्ट करते हैं कि सत्यान्वेषी जाँच और प्रमाण-युक्त कथा वही हो सकती है जो परमेश्वर के भेजे हुए के कारण हो; जो अपनी बहादुरी से अपनी बड़ाई चाहता है, वह असत्य और अधर्म में लिप्त है।
गूढ़ संदेश क्या प्रकट करता है
यह शास्त्र दिखाता है कि सत्यापन और प्रतिष्ठा कहाँ से आती है। माता-पिता, नेताओं या शिक्षकों द्वारा दी गई बातों में यदि आत्म-प्रशंसा हो, तो वह आत्म-तर्क के आधार पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के उद्देश्य की पुष्टि से नहीं जुड़ती। किन्तु जो अपने भेजे गए की बड़ाई करता है, वही सचाई के मार्ग पर है, क्योंकि उसका विवेक और परीक्षण परमेश्वर के आदेश के अनुरूप है।
महत्वपूर्ण शब्दों और फोटो-छवि की स्पष्टता
संबंधित बाइबिल पवित्रग्रंथ
1) मत्ती 23:10-12— धार्मिक नेताओं के भीतर विनम्रता और ग्लानि के स्थान पर क्या होना चाहिए, यह दर्शाता है कि मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि नहीं, बल्कि परमेश्वर-आनुकूल सेवा मुख्य है।
2) योहान्ना 5:30— पुत्र अपने आप निर्णय नहीं करता, बल्कि माँगता है कि वह पिता की इच्छा पूरी करे; स्व-उच्चाई कम करके परमेश्वर की महिमा में विश्वास बढ़ता है।
3) 1 कुरिन्थियों 4:4— ताकि हमारी प्रवृत्ति और विवेक आत्म-आख्यान के कारण नहीं, बल्कि ईश्वर के परीक्षण से प्रमाणित हो सके।
एहसास और ऐतिहासिक व्याख्या
पवित्रता के इतिहास में, संदेशवाहक के गौरव से अधिक परमेश्वर के कार्य की पुष्टि मायने रखती है। आधुनिक पाठ में भी यह प्रेरक है कि चर्च के नेता या विद्वान अपनी प्रतिष्ठा से ऊपर आकर परमेश्वर की दृष्टि में विश्वसनीय ठहरना चाहिए—ताकि विश्वास पंक्ति में सत्य और नैतिकता सुरक्षित रहे।
आज के पाठ के लिए आवेदन
कथन-उद्धरणों के लिए संक्षिप्त संदर्भ: यह विवेचनMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों के सार से समर्थित है; आवश्यक रूप से उनके शब्दों के विशिष्ट छोटे उद्धरण सादर उल्लेखित हैं यदि उपलब्ध हों।