यूहन्ना 7:28 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब यीशु ने मन्दिर में उपदेश देते हुए पुकार के कहा, “तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहाँ का हूँ। मैं तो आप से नहीं आया परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है, उसको तुम नहीं जानते।

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यूहन्ना 7:28 पद-दर-पद बाइबल टीका

यूहन्ना 7:28 में यीशु का उपदेश-आधार

सीधे शब्दों में meaning: यीशु मन्दिर में उपदेश दे रहे थे और लोगों से कह उठे कि वे उन्हें जानते हैं और यह भी जानते हैं कि मैं कहाँ का हूँ; परन्तु मैं स्वयं नहीं आया, बल्कि जिसने मुझे भेजा है वह सच्चा है, उसे आप नहीं जानते। यहाँ उनका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि वह परमेश्वर के भेजे हुए हैं और उनके स्रोत का ज्ञान मानवों में सामान्यतः नहीं है।

पार्श्व-परिप्रेक्ष्य

यह वाक्या यूहन्ना के Gospel के उस खण्ड से है जहाँ यीशु अपने विरोधियों के सामने अपनी पहचान और मंज़िल को लेकर स्पष्टता प्रकट करते हैं। उनकी बात का केंद्र यह है कि वे आध्यात्मिक उत्पत्ति और कर्तव्य से अवगत नहीं हैं—उनके मानने वाले लोग भी आस्था के संबंध में भ्रमित हैं। परन्तु जो उसे मानते हैं, वे जानेंगे कि उसका स्रोत कौन है और वह कहाँ से आया है।

व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ

  • “तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहाँ का हूँ”—यह वाक्य मानवीय पहचान और.origin के भीतर सच बतलाता है। यीशु अपने संबंध को परमेश्वर के साथ जोड़े हुए, जनता को यह संकेत दे रहे हैं कि उनकी संतुष्टि और शिक्षण ऊपर से आता है।
  • “मैं तो आप से नहीं आया परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है”—यह इस बात का प्रचार है कि यीशु स्वयं नहीं बल्कि परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार आया है। उसके शास्त्र और चमत्कार उसी स्रोत की पुष्टि करते हैं।
  • “उसे तुम नहीं जानते”—यह संकेत देता है कि मानवीय दृष्टि से परमेश्वर के कार्य और उनके भेजे हुए के वास्तविक स्रोत को पहचानना कठिन है, क्योंकि आध्यात्मिक दृष्टि और आत्मिक कब्रें ही यह उद्घाटित कर सकती हैं।

कनिष्ठ मार्गदर्शक विचार (छोटे थीमैटिक बिंदु)

क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-सम्बन्ध)

1) मत्ती 11:25-27 में यीशु पिता के हालात और ज्ञान के बारे में ईश्वरीय प्रस्तुति बताते हैं—पिता का ज्ञान कुछ लोगों के लिए खुला होता है, दूसरों के लिए नहीं। यह दिखाता है कि ज्ञान की डोर ऊपर से ही आती है।

2) यूहन्ना 6:38-40 में यीशु अपने आत्मीय स्रोत और उद्देश्य को दोहराते हैं—आना और परम पिता की इच्छा को पूरा करना।

3) मकरू 4:11 में शिष्य-पात्रता और दूसरों को प्रकाश दिखाने की बात—आत्मिक रोशनी और स्वर्गीय स्रोत का उद्घाटन।

संक्षिप्त व्यावहारिक निश्कर्ष

हमारे लिए सीख यह है कि वास्तव में ज्ञान और उद्देश्य का स्रोत वही है जो ऊपर से आता है। धार्मिक-आडंबर के बजाय, हमारी निष्ठा और आस्था यीशु के साथ जुड़ी रहे—जो परमेश्वर के भेजे हुए हैं। हमारी पहचान और शिक्षण-Evidence उसी स्रोत पर टिके हैं जिसे मानना और समझना चाहिए।

नोट: नीचे दी गई पाठ-आत्मतत्वों में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के कुछ सटीक उद्धरण-रेखाएँ प्रयुक्त हो सकती हैं; पूर्ण पाठ नहीं दिए जाते।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यूहन्ना 7:28 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यीशु ने उनसे कहा, “यदि परमेश्‍वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझसे प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्‍वर में से निकलकर आया हूँ; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा।

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उन्होंने उससे कहा, “तेरा पिता कहाँ है?” यीशु ने उत्तर दिया, “न तुम मुझे जानते हो, न मेरे पिता को, यदि मुझे जानते, तो मेरे पिता को भी जानते।”

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तुम्हारे विषय में मुझे बहुत कुछ कहना और निर्णय करना है परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है; और जो मैंने उससे सुना है, वही जगत से कहता हूँ।”

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