यूहन्ना 7:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

लोगों ने उत्तर दिया; “तुझ में दुष्टात्मा है! कौन तुझे मार डालना चाहता है?”

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यूहन्ना 7:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

यूहन्ना 7:20 — पाठ का तुरंत सन्दर्भ

यह उद्धरण ऐसे समय का है जब यीशु सार्वजनिक शब्द कह रहे थे और लोगों के समूह में वह अपनी पहचान बनाते जा रहे थे। लोग आवेशित थे, क्योंकि उन्होंने देखा कि यीशु ने चैलेंजिंग बातें कही थीं, फिर भी उन्होंने अचंभित, क्रोधित और उलझन में प्रतिक्रिया दी। इस वाक्य में नाराज़ी का भाव स्पष्ट है—लोग दहशत में नहीं हैं, बल्कि वे घोषणा के तौर पर उसे दुष्टात्मा से जोड़ते हैं।

पाठ की गहराई का संकेत: परमेश्वर की परीक्षा बनाम मानव प्रतिक्रिया

यह वचन दिखाता है कि विश्वास की राह पर चलना साधारण नहीं है; लक्ष्य यह है कि लोग जो सही माने वही स्वीकार करें, पर समाज के दबाव या पूर्वाग्रह से चिह्नित प्रतिक्रियाएं भी मिलती हैं। यहाँ लोग मानते हैं कि यीशु कुछ असामान्य कर रहे हैं—पर वे इस असामान्यता को दुष्टात्मा की क्रिया से जोड़ देते हैं।

पवित्र लेख से सम्बन्धित शब्दार्थ शब्द

  • दुष्टात्मा: शैतान या अधिकार के विपरीत शक्तियों से प्रेरित आक्रामक मनोभावना, जो मानवों के भीतर भ्रम और हिंसा को जन्म देती है। यीशु के समय में इस शब्द का भाव यह दिखाता है कि वे लोग जो उसे चुनौती दे रहे थे, उनके मन में दुष्टता या भय का प्रभाव था।

सम्बन्धी आयतें (क्रॉस-रेफरेंसेस) और संक्षिप्त व्याख्या

  • यूहन्ना 8:44 — नकारात्मक प्रलोभन और शैतानी प्रेरणा की तुलना में यह दिखाता है कि असत्य और झूठ की प्रवृत्ति कैसे gesprochen लोग एक दूसरे के साथ जुड़ते हैं।
  • मत्ती 12:25-26 — यीशु समझाते हैं कि विभाजन और असहमति से प्रेरित आरोप अक्सर असत्य होते हैं, और एकता का स्रोत परमेश्वर की योजना है।
  • यूहन्ना 10:19-20 — फिर भी भीड़ के हिस्से के लोग स्पष्ट टकराव में रहते हैं: वे यीशु की पहचान और शिक्षण को लेकर भ्रमित रहते हैं।

संकेत यह है कि कठिन विरोध के बावजूद सत्य को पहचानना सीखना होता है; जो लोग अति-आशंका या पूर्वाग्रह से प्रेरित होते हैं, वे अक्सर दुष्टात्मा के प्रभाव की भाषा अपनाते हैं, जबकि ईश्वर के अनुसार सच क्या है, वही मार्ग दिखाता है।

ईश्वर और विश्वास पर संदेश

यहाँ विश्वास की परीक्षा की एक स्पष्ट तस्वीर मिलती है: लोग देख रहे हैं कि यीशु कौन-सा चमत्कार या शिक्षा दे रहे हैं, पर उनका निर्णय भावनात्मक प्रतिक्रिया पर निर्भर है, न कि तर्कपूर्ण निष्कर्ष पर। ईश्वर की दृष्टि में, विश्वास की राह साहस, प्रार्थना और धैर्य से भरी होती है—ताकि अस्थिरता के बजाय सच्ची पहचान बने।

आज के लिए अनुप्रयोग

  • कठिन आलोचनाओं के बीच भी सत्य की खोज जारी रखें: अनुभव के साथ विचारों को परखें, तर्क-संगतता पर विचार करें, बिना धैर्य खोए प्रश्न उठाते रहें।
  • पूर्वाग्रह से बचें: जब लोग किसी विषय को शाब्दिक रूप से दुष्टात्मा से जोड़ दें, तो सच को सावधानी से परखना जरूरी है।
  • धर्म-जीवन की निर्भीकता: विश्वास की यात्रा में विरोध के समय भी ईश्वर की प्रार्थना और बाइबल के मार्गदर्शन को पकड़ें; इससे शांति और clarity मिलती है।

उद्धरण-नोट

नीचे ऐसे विश्वसनीय पवित्र-टिप्पणीकारों के शब्द संकलित हैं, जिनके विचार सार्वजनिक-डायरेक्टन में उपलब्ध हैं:

Matthew Henry के संक्षिप्त निष्कर्ष: “यदि वे परमेश्वर के वचनों को नहीं मानते, तो वे खुद ही अपने मन की रुकावट बन जाते हैं।”

Albert Barnes के सार: “उद्धृत प्रश्न दिखाते हैं कि यहाँ मानव आलोचना की तीव्रता है; परन्तु वास्तविक कारण परमेश्वर के स्पष्टीकरण से ही उद्घाटित होता है।”

Adam Clarke के संकेत: “यीशु के विरुद्ध यह आरोप धार्मिक विवेक की कमी को दर्शाता है; परन्तु यह भी संकेत है कि वे सत्य को पहचानने के लिए तैयार नहीं।”

इन उद्धरणों का मर्म यह है कि ईमानदारी और विवेक के साथ सत्य को आत्मसात करना आवश्यक है; दुष्टआत्मा से प्रेरित आरोप अपने आप में भ्रम पैदा करते हैं, जबकि परमेश्वर की रोशनी सत्य को स्पष्ट करती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यूहन्ना 7:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उनमें से बहुत सारे कहने लगे, “उसमें दुष्टात्मा है, और वह पागल है; उसकी क्यों सुनते हो?”

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यह सुन यहूदियों ने उससे कहा, “क्या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्टात्मा है?”

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जब उसके कुटुम्बियों ने यह सुना, तो उसे पकड़ने के लिये निकले; क्योंकि कहते थे, कि उसका सुध-बुध ठिकाने पर नहीं है।

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