Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 8:1 यूहन्ना 8:2 यूहन्ना 8:3 यूहन्ना 8:4 यूहन्ना 8:5 यूहन्ना 8:6 यूहन्ना 8:7 यूहन्ना 8:8 यूहन्ना 8:9 यूहन्ना 8:10 यूहन्ना 8:11 यूहन्ना 8:12 यूहन्ना 8:13 यूहन्ना 8:14 यूहन्ना 8:15 यूहन्ना 8:16 यूहन्ना 8:17 यूहन्ना 8:18 यूहन्ना 8:19 यूहन्ना 8:20 यूहन्ना 8:21 यूहन्ना 8:22 यूहन्ना 8:23 यूहन्ना 8:24 यूहन्ना 8:25 यूहन्ना 8:26 यूहन्ना 8:27 यूहन्ना 8:28 यूहन्ना 8:29 यूहन्ना 8:30 यूहन्ना 8:31 यूहन्ना 8:32 यूहन्ना 8:33 यूहन्ना 8:34 यूहन्ना 8:35 यूहन्ना 8:36 यूहन्ना 8:37 यूहन्ना 8:38 यूहन्ना 8:39 यूहन्ना 8:40 यूहन्ना 8:41 यूहन्ना 8:42 यूहन्ना 8:43 यूहन्ना 8:44 यूहन्ना 8:45 यूहन्ना 8:46 यूहन्ना 8:47 यूहन्ना 8:48 यूहन्ना 8:49 यूहन्ना 8:50 यूहन्ना 8:51 यूहन्ना 8:52 यूहन्ना 8:53 यूहन्ना 8:54 यूहन्ना 8:55 यूहन्ना 8:56 यूहन्ना 8:57 यूहन्ना 8:58 यूहन्ना 8:59



सीधे अर्थ का बयान
यूहन्ना 8:26 में यीशु अपने आप से कहते हैं कि उनके पास कहने के लिए बहुत कुछ है, परन्तु उनका संदेश वही है जो पिता ने भेजा है; वे परम सत्य हैं और जो वे सुनते हैं, वही वे संसार से कहते हैं।
परिप्रेक्ष्यगत पृष्ठभूमि
यह प्रसंग यूहन्ना के अनुसार अनुयायियों को भीतर से जाँचने, सत्य की पहचान और जन्म-जगत के विरोध के बीच यीशु की भूमिका को स्पष्ट करता है। यीशु यह भी दिखाते हैं कि उनका शब्द किसी पृथक-सी स्वतंत्र विचार नहीं, बल्कि परम पिता के भेजे हुए संदेश का अंग है। इस दायरे में उनका संदेश परम पिता की प्रामाणिकता और आस्था के साथ जुड़ा है, ताकि विश्व पहचान सके कि वे परमेश्वर के पुत्र हैं और उसका उद्देश्य उद्धार है।
व्याख्यात्मक विचार
छोटी थीमेटिक सूची
अन्य शास्त्रीय टिप्पणियाँ (संक्षेप)
Matthew Henry के अनुसार, यीशु अपने संदेश की महत्ता को सीमित नहीं करते; वे कहते हैं कि जो कुछ वे बोलते हैं, वह पिता की इच्छा का प्रतिफल है। Albert Barnes इस दृष्टिकोण को यह मानते हैं कि यीशु के उपदेशों का स्रोत ऊपर से है और उनका लक्ष्य मानवजाति को सत्य के अनुग्रह तक आकर्षित करना है। Adam Clarke इस कथन को यह मानते हैं कि यीशु निर्भय होकर सत्य को बताते हैं, भले ही उसे विरोध का सामना क्यों न करना पड़े; यह उनके मिशन की धुरी है।
पवित्र शास्त्र के कुछ संक्षिप्त संदर्भ
• अन्य उद्धरणीय संदर्भ जहाँ पित्र के संदेश को पुत्र के माध्यम से कहा गया: सत्य के प्रकटन और चेतावनी की भूमिका पर प्रकाश पड़ता है।
• यह संकेत करता है कि धार्मिक नेताओं के बीच भी सत्य का प्रदर्शन और परीक्षण आवश्यक है, ताकि लोग सत्य में जीवन पा सकें।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम क्या सीखें: सत्य से डरना नहीं चाहिए; परमेश्वर का संदेश हमारे भीतर विश्वास के साथ ग्रहण करें और उसके अनुसार अपने जीवन को ढालें। अगर हम यीशु के वचन को दिल से स्वीकारते हैं, तो यह हमारे दैनिक निर्णयों, नैतिकता और सेवाकर्मों को मार्ग देता है।
प्रेषित संदेश का सार
कुल मिलाकर, यह वाक्य एक स्थिर और नम्र घोषणा है—जो कुछ कहा जा रहा है वह परम पिता में निहित है, और जो सुना गया है वही ज्योति से नयी दिशा देता है।