Old Testament
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यूहन्ना 8:1 यूहन्ना 8:2 यूहन्ना 8:3 यूहन्ना 8:4 यूहन्ना 8:5 यूहन्ना 8:6 यूहन्ना 8:7 यूहन्ना 8:8 यूहन्ना 8:9 यूहन्ना 8:10 यूहन्ना 8:11 यूहन्ना 8:12 यूहन्ना 8:13 यूहन्ना 8:14 यूहन्ना 8:15 यूहन्ना 8:16 यूहन्ना 8:17 यूहन्ना 8:18 यूहन्ना 8:19 यूहन्ना 8:20 यूहन्ना 8:21 यूहन्ना 8:22 यूहन्ना 8:23 यूहन्ना 8:24 यूहन्ना 8:25 यूहन्ना 8:26 यूहन्ना 8:27 यूहन्ना 8:28 यूहन्ना 8:29 यूहन्ना 8:30 यूहन्ना 8:31 यूहन्ना 8:32 यूहन्ना 8:33 यूहन्ना 8:34 यूहन्ना 8:35 यूहन्ना 8:36 यूहन्ना 8:37 यूहन्ना 8:38 यूहन्ना 8:39 यूहन्ना 8:40 यूहन्ना 8:41 यूहन्ना 8:42 यूहन्ना 8:43 यूहन्ना 8:44 यूहन्ना 8:45 यूहन्ना 8:46 यूहन्ना 8:47 यूहन्ना 8:48 यूहन्ना 8:49 यूहन्ना 8:50 यूहन्ना 8:51 यूहन्ना 8:52 यूहन्ना 8:53 यूहन्ना 8:54 यूहन्ना 8:55 यूहन्ना 8:56 यूहन्ना 8:57 यूहन्ना 8:58 यूहन्ना 8:59



यूहन्ना 8:44 का पठन-पार्श्व और उनकी व्याख्या
पद का परिस्थिति-परिदृश्य: यीशु यहूदियों से स्पष्ट कर रहे हैं कि वे परमपिता परमेश्वर के बजाय अपने वास्तविक पिता के अनुरूप आचरण करते हैं। वे लोग जो दुष्टता की प्रवृत्ति दिखाते हैं, वे शैतान के वंशज बन जाते हैं, क्योंकि उसका शिक्षा-सामर्थ्य उनके भीतर है। यहोवा के सत्य से दूर रहने और झूठ के पीछा में लगना ही शैतानी प्रवृत्ति का परिणाम है।
ईश्वर या आस्था के बारे में दर्शाती बात
यह वाक्य ईश्वर के साथ सत्य, पवित्रता, और बिन-झूठ के जीवन की स्पष्ट कसौटी है। शैतान को परमेश्वर के सामने असत्य और हत्या से जुड़ा हुआ चित्रण करते हुए यीशु बतला रहे हैं कि असत्य और हत्या समझौते नहीं करतीं; वे जीवन के स्रोत के विपरीत हैं। सत्य पर स्थिर न रहना और झूठ बोलना शैतान के स्वभाव का अभिव्यक्ति है, जबकि ईश्वर का पुत्र बनना सत्य के अनुरूप और प्रेमपूर्ण आचरण माँगता है।
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य קשר-उद्धरण और संदर्भ
- 1 जै 3:8 में स्पष्ट कहा गया है कि जो यहोवा के काम नहीं करता, वह पाप का रहता है; यहाँ भी सत्य और झूठ का मूलभेद चित्रित होता है।
- याकूब 1:14-15 बताता है कि इच्छा में ठहराव न रहकर पाप जन्म लेता है, जो इस पाठ के झूठ के जन्म के विचार से संरचित है।
- यूहन्ना 14:6 में यीशु कहते हैं, मैं मार्ग हूँ, सत्य हूँ और जीवन हूँ; इस बिंदु पर यह verse असत्य के विरुद्ध सत्य के साथ जीवन की राह दिखाता है।
छोटे-से शब्दावली-सार
यह पंक्तियाँ यह सिखाती हैं कि सत्य में स्थिर रहने से ही ईश्वर के पुत्रत्व की पहचान बनती है, और झूठ-चाल शैतान के वृत्त में है। हमारे दैनिक जीवन में सत्य का चयन, प्रेम का मार्ग, और हिंसा-हत्यात्मक प्रवृत्ति से दूर रहना ही क्रिश्चियन आचरण का असली परीक्षण है।
आज का अनुप्रयोग
Cross-references: 1) झूठ और सत्य के संघर्ष पर प्रेरित संबंध; 2) पाप-इनरचिंग और जीवन के मार्ग के बारे में जागरूकता; 3) यीशु के मार्ग, सत्य और जीवन की घोषणा से प्रेरित व्यक्तिगत विश्वास-सरोकार।
इस पाठ के अनुसार, सच्चे बच्चे वही हैं जो सत्य के साथ चलते हैं और ईश्वर के पुत्रत्व के जीवन को अपनाते हैं; अन्यथा, उनका जीवन शैतान के स्वभाव के अनुरूप ढलता चला जाता है।
उद्धरण नोट: इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शाब्दिक पूर्ण वाक्यों का प्रत्यक्ष उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है; लेकिन उनके विचारों के संकलन से यहाँ पर सारगर्भित व्याख्या प्रस्तुत की गई है।