योना 4:4 बाइबल पद की व्याख्या
योना 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा ने कहा, “तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?”
योना 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योना 4:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 20:15 (HINIRV) »
क्या यह उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूँ वैसा करूँ? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है?’

योना 4:9 (HINIRV) »
परमेश्वर ने योना से कहा, “तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है?” उसने कहा, “हाँ, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन् क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।”

भजन संहिता 106:32 (HINIRV) »
उन्होंने मरीबा के सोते के पास भी यहोवा का क्रोध भड़काया, और उनके कारण मूसा की हानि हुई;
योना 4:4 पर टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य
यह पद यहोवा के कथन कीidung के साथ ही यूनानी कथा की आत्मा दिखाता है: हमारे भीतर का क्रोध तब तक तटस्थ नहीं रहता जब तक वह परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप आकार नहीं ले लेता। यहोवा ने कहा, “तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?”—यह एक चेतावनी है कि निपट क्रोध बिना न्याय की कसौटी पर नहीं तौलना चाहिए। यह दृष्टि पाठक को यह विचार देती है कि परमेश्वर का उद्देश्य संसार के लिए करुणा और न्याय का संतुलन है, न कि मनुष्यों के अहंकार की प्रतिक्रिया।
पद का मूल संदर्भ और स्थिति
योना के पुस्तक में निंदा और दया के बीच की जंग दिखाई देती है। नाविकों, योना, और शहर नीनवे के निवासियों के बीच के घटनाक्रम के बीच—जहाँ यीशु-स्तर के समय में एक भविष्यसूचक नबूती संदेश हवा में है—यह पद उस समय की मानवीय प्रतिक्रियाओं पर प्रकाश डालता है। योना ने नीनवे की प्रतिष्ठान के कारण क्रोध में एक उग्र आवेश पाया, पर परमेश्वर उसका लक्ष्य बदल देता है: वह दया का कारण बनता है।
मुख्य संदेश
इस वाक्यांश का मूल संदेश है कि सच्चा संदेह तब आता है जब हमारा क्रोध परमेश्वर की करुणा और न्याय की दृष्टि में आकर परिलक्षित होता है। जब हम अपने स्वार्थी अहंकार से ऊपर उठकर परमेश्वर की योजना समझते हैं, तब क्रोध का स्वरुप शांति और करुणा में ढल सकता है। यह पाठ हमें सीख देता है कि ईश्वर की योजना में मानव क्रोध अक्सर मानव-निर्मित सीमाओं को पार कर देता है, और तब उसे संयम और नम्रता से समझना चाहिए।
प्रमुख बाइबल थीम्स से सम्बन्ध
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
– राजाओं के समय में भी मनुष्यों की प्रभुता के सामने परमेश्वर की योजना स्थिर रहती है। यह पठन-प्रवाहित उत्सुकता हमें दया के उच्च मानदंड दिखाती है।
– स्पर्श-संबंधित अन्य भाग जो परमेश्वर के विधान, दया और मानव क्रोध के मेल को स्पष्ट करते हैं।
– अन्य नबियों के उदाहरण जो दया के समय पवित्र न्याय की मांग करते हैं।
अनुदेशात्मक विचार
हमें यह याद रखना है कि परमेश्वर का लक्ष्य ही संपूर्णता है; हमारा क्रोध यदि वह लक्ष्य के विरुद्ध उबल उठे तो वह ईमानदारी से नहीं गिना जाएगा। आत्म-निरीक्षण करें: क्या आपका क्रोध परमेश्वर के सच्चे न्याय और करुणा के अनुसार है, या यह केवल आपकी अपेक्षित परिणामों के साथ जुड़ा है?
संक्षिप्त देवotional विचार
जब तेज़ी से क्रोध उभरता है, तब शांति के लिए गहराई से सांस लें। परमेश्वर की करुणा से प्रेरित होकर कार्य करें, ताकि आपका क्रोध भी दया में परिवर्तित हो सके। यहॉं दी जाने वाली सीख यही है: क्रोध की जगह प्रेम और धैर्य को अपनाएँ, ताकि आप नीनवे की तरह परिवर्तन-स्वरूप बन जाएँ।
सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरण संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट छोटे उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; स्रोतों के अनुरोध पर वे यहाँ उद्धृत नहीं हैं, बल्कि उनके सामान्य विचारों के अनुसार सारांशित किया गया है।
क्रॉस-रेफरेंसेस का सम्पादनिक उपयोग: नीचे तीन संक्षिप्त cross-references देखें और उनसे मिलने वाले तर्क का संक्षेप समझें—