योना 4:2 बाइबल पद की व्याख्या
योना 4:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उसने यहोवा से यह कहकर प्रार्थना की*, “हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैंने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, और विलम्ब से कोप करनेवाला करुणानिधान है, और दुःख देने से प्रसन्न नहीं होता।
योना 4:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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योना 4:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 86:15 (HINIRV) »
परन्तु प्रभु दयालु और अनुग्रहकारी परमेश्वर है, तू विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है।

निर्गमन 34:6 (HINIRV) »
और यहोवा उसके सामने होकर यों प्रचार करता हुआ चला, “यहोवा, यहोवा, परमेश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करुणामय और सत्य,

गिनती 14:18 (HINIRV) »
कि यहोवा कोप करने में धीरजवन्त और अति करुणामय है, और अधर्म और अपराध का क्षमा करनेवाला है, परन्तु वह दोषी को किसी प्रकार से निर्दोष न ठहराएगा, और पूर्वजों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों, और पोतों, और परपोतों को देता है।
योना 4:2 — संदर्भ-सार और गहराई
योनाह किताब का संदर्भ: योना ने निनवे के नगर के बारे में अपने दयालु परमेश्वर के साथ बातचीत की थी ताकि वह वहाँ की जनजाति के पाप पर दया माँगे। इस वाक्य में योना अपने ऊपर लगे पूर्वाग्रह और परमेश्वर के दयालु स्वभाव के बीच संघर्ष व्यक्त करता है। वाक्य में वह “यहोवा से यह कहकर प्रार्थना” करता है कि उसने वही कहा था जो उसका मन अभी किया गया—यानी निष्कासन के लिए डर और निष्कारण के लिए उत्साह की तैयारी। यह परमेश्वर की करुणा और मानवीय असफलताओं के बीच एक तीखा चित्रण है।
मुख्य अर्थ
योना यह कहकर प्रार्थना करता है कि वह जानता था “तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलंब से कोप करनेवाला करुणानिधान है, और दुःख देने से प्रसन्न नहीं होता।” यहाँ उसका आशय यह है कि अगर उसने निनवे के लोगों के लिए दया माँगी होती तो परमेश्वर सचमुच दयालु रहते—यही कारण है कि तूने उसे जल्दी से तर्शीश करने से रोक दिया था। यह बयान पूरी कथा में परमेश्वर के बहु-आयामी गुणों के प्रति योना की मान्यता को दर्शाता है।
तीन प्रमुख थीम
व्यावहारिक प्रकटन
हमें यह सीख मिलती है कि ईश्वर की करुणा समय और संदर्भ से मुक्त है। हम भी अपने मन में किसी व्यक्ति या समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह रख दें, तो परमेश्वर की दयालुता उससे बड़े उद्देश्य के लिए प्रेरित हो सकती है। पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर किस प्रकार नवनिर्माण और परिवर्तन के सूर्य की तरह फैलते हैं—हम चाहे कितने भी विरोधी क्यों न हों, उनकी कृपा का अवसर खुला रहता है।
सूत्रीकरण और क्रॉस-रेफरेंसे
केंद्रीय क्रॉस-रेफरेंस संदर्भ: - यीशु के करुणामय उपदेशों में परमेश्वर का दया-स्वभाव (नि:स्वार्थ करुणा). - जनम 18:25 (प्रारम्भिक संदर्भ: परमेश्वर की न्याय-करुणा की संगति). - एपे. 2:4–5 (परमेश्वर की दया के कारण दूतों के सद्गुणों का संकुचन). छोटे-छोटे संकेत: यी 40:11; नहे 9:17.
पठन-योग्य सरल टिप्पणी
यहाँ योना का प्रार्थना-उद्धरण एक नज़दीकी मानवीय दृश्य प्रस्तुत करता है: वह जानता है कि परमेश्वर कितना दयालु है, पर वह अपने देश के लोगों के लिए पक्षपाती दुविधा में है। वृहत दृश्य में परमेश्वर का करुणामय मार्ग स्पष्ट होता है—दया से ही सत्य की दिशा मिलती है, जिसे योना ने समझ लिया, पर उसे अपने दायरे से बाहर निकालना चाहा।
छोटा सार
योना 4:2 हमें सिखाता है कि परमेश्वर की दयालुता मानव सीमाओं से परे है, और दया के उद्देश्य से हमने अपने दिलों को खोलना सीखना चाहिए।
उद्धरण-नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों की प्रत्यक्ष संकलन-उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि किसी उपलब्ध संपूर्ण उद्धरण का संकलन हो, तो वह नीचे जोड़ा जाएगा।