Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 14:18—पवित्र आराधना के बीच परम करूणा और न्याय
यह वचन किसान-यात्रा की समानांतर कथा से निकलती है, जब इस्राएली म Israelites पथ के दौरान परमेश्वर के सामने विरोध और आज्ञाओं के पालन की परीक्षा से गुजर रहे थे। यह आशीर्वचन एक दृढ़ निर्णय के साथ आता है: परमेश्वर धीरजवन्त है, और अत्यंत करुणामय है; वह पाप को क्षमा करता है। पर साथ ही यह स्पष्ट करता है कि अल्पसंख्यक या दोषी को भी निर्थक नहीं ठहराया जाएगा—किसी भी प्रकार की निर्दोषता का अपहरण नहीं होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि पूर्वजों के अधर्म का दण्ड उनके बच्चों और पोतों को भी भुगतना पड़ सकता है।
ईश्वर के चरित्र की स्पष्ट तस्वीर
यह पद परमेश्वर के दोहरे पक्ष को दर्शाता है: करुणा और न्याय। करुणामय होने के कारण वह क्षमा करता है—जो व्यक्ति पश्चात्ताप की सोच से लौटे, उन्हें सहनशक्ति देता है। परन्तु न्याय के कारण अन्याय या दोषों के लिए दण्ड ठहरता है। यह संतुलन प्रेरित करता है कि हम परमेश्वर के साथ सही-झूठ की रेखा को समझें: वह दयालु है, पर अधर्म से समझौता नहीं करता।
महत्वपूर्ण शब्दों एवं imagery की स्पष्टता
संबद्ध पाठ के संकेत
– उल्लेखित विचारों के साथ जुड़ने वाले अन्य ग्रंथ: सेमयोजित तौर पर परमेश्वर की यह धारणाएं जन्म लेने के बाद भी निरंतर बनी हैं; उदाहरण के लिए, सामर्थ्य-पराक्रम और दयालुता का संयोजन नए विधान में भी मिलता है।
पूर्वजन-आचरण और प्रभाव
यह पद बताते हैं कि पाप का दण्ड केवल व्यक्तिगत नहीं रहता; सामाजिक या परिवारिक संदर्भों में भी प्रभाव दिख सकता है। परन्तु परमेश्वर का धैर्य यह अवसर देता है कि परिवारों में सुधार संभव हो।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त उल्लेख
1) निर्गमन 34:6–7 में परमेश्वर के धैर्य-करुणा की मिसाल मिलती है—जहाँ वह धीरज दिखाते हुए पापों को क्षमा और न्याय का संतुलन बनाए रखते हैं।
2) कृपा और निष्पादन का संयोजन रोमी 11:22 में भी मिलता है—जो यह दर्शाता है कि चमत्कारी कृपा के साथ वैध न्याय भी है।
3) भजन 103:8–12 में बतलाया गया है कि भगवान दयालु हैं, क्षमाशील हैं, और देर तक क्रोध नहीं करते—परन्तु पाप के परिणाम अपरिवर्तित नहीं रहते।
उच्चारण-नोट: इस पवित्र पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पुराने-पूर्व-ग्रंथों से संजोए गया सार यहाँ समाहित किया गया है। अगर आप जैसी छोटी-सी उद्धरण चाहिए, तो मैं उनमें से किसी एक से ठोस शब्दवार उद्धरण दे सकता हूँ।