Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 14:39 — वर्तमान संदर्भ के भीतर दृश्यता
यह उपदेश हम बार बार इस्राएली समुदाय के उस मोड़ पर पहुँचते हैं जब मूसा ने वे सब को सूचित किया कि वे वाचा-भूमि पर प्रवेश के लिए कितनी तैयारी करें। इस वाकya में दृश्य होता है कि यहूदियों ने मूसा की सूचना सुनकर बहुत विलाप किया। यह भावनात्मक प्रतिक्रिया उनकी निश्चय-आशा और विश्वास की दुर्बलता दोनों की मिसाल बनती है।
पाठ से प्रकट शिक्षा: परमेश्वर और विश्वास
कहानी की यह बेला जताती है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ ईमानदार है और उनके निर्णयों के परिणामों के प्रति उन्हें चेतावनी देता है। इस वाक्य में दिख रहा है कि जब लोग परमेश्वर के निर्देशों को समझते हैं, तो कुछ लोग आंतरिक पीड़ा से विलाप करते हैं—यह उनके अंधेरे में रोशनी को देख पाने की कोशिश का हिस्सा है। फिर भी, परमेश्वर की योजना में विश्वास बनाए रखना ज़रूरी है, भले ही वह तुरंत न दिखे।
महत्वपूर्ण शब्द/छवि की स्पष्ट व्याख्या
संबंधित पवित्र ग्रंथ
ये पाठ अन्य जगहों से प्रेरणा पाते हैं कि परमेश्वर अपने वचनों के साथ साथ नेतृत्व भी देता है और विश्वासघाती आशाओं के बीच भी सत्य को बनाए रखता है:
हिंदी व्याख्या: आज के लिए अनुप्रयोग
आज के भक्त के लिए यह पाठ यह सिखाता है कि जब हम कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का उद्देश्य बनाते हैं, तो हमारी भावनाएँ कभी-कभी निराशा दिखाती हैं। यह न तो विश्वास की कमी है, न ही पाप; यह मानव प्रकृति की आंतरिक प्रतिक्रिया है। पर यह भी याद रखें कि परमेश्वर की योजना विश्वस्त और स्थिर है। इसलिए नीचे दिए गए कदम आज के दिन के लिए उपयोगी हो सकते हैं:
2–3 cross-references (संक्षेप में और बिना पूर्ण पद उद्धरण)
इन संदर्भों से समन्वय समझना सरल होता है:
इस पंक्ति के भीतर एक सामान्य विवेक बनता है: परमेश्वर के मार्ग पर चलना हमारी समझ से बाहर हो सकता है, पर वही स्थिर है। मनुष्यों की विलाप-आवाज़ के बीच ईश्वर की वाणी और आशीष अभी भी उपलब्ध रहती है, यदि हम उसे ध्यान से सुनते रहें।
नोट: इस पंक्ति पर Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के मौलिक विचारों से सहायक टिप्पणियाँ संक्षेप में समाहित की गई हैं; जहाँ उनके सीधे उद्धरण उपलब्ध होते हैं, वहाँ संक्षिप्त पाठ दिये गए हैं।