Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 14:30 —Immediate setting
उसी पीढ़ी के भीतर से, जिन्होंने मिस्र से निकलकर गिनती के रास्ते में विश्वासयोग्य नहीं रहे, परख और बहिष्कार का परिणाम सामने आता है। यह वचन विशेषकर यह बताता है कि क्यों एक पवित्र शासन ने वे स्वीकृत किए नहीं जो विश्वासघाती प्रवृत्ति के कारण लौटकर नहीं आ सके। पवित्र शास्त्र के अनुसार, कुचल-विश्वास वाले लोग अपने मार्ग से नहीं हटते तो उनके ऊपर शांति और भूमि के भाग्य का एक नया क्रम खुलता है; परन्तु उन वृद्धों में से जो नून के पुत्र यहोशू-और-कालेब थे, उनके साथ यह वादा अलग ढंग से जुड़ता है।
परमपिता और विश्वास का पाठ
यह पाठ यह समझाता है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञा और इरादा, मानव-विश्वास पर निर्भर नहीं रहते। गोत्रीकरण के समय, विश्वासघाती प्रतिक्रियाओं के कारण जनता को न्याय के रूप में दंड दिया गया; परन्तु सचेत और दृढ़ विश्वास रखने वाले कालेब और यहोशू को छोड़कर अन्य सभी उस देश में प्रवेश नहीं कर पाए—यही शपथ का महत्व है। यह उदाहरण बताता है कि परमेश्वर अपने वादों को पूर्ण करता है, पर वह उन पर निर्भर रहता है जो भरोसा बनाए रखते हैं।
मुख्य शब्द और रूपक
अन्य प्रासंगिक पाठ
1 कुरिन्थियों 10:5- “परन्तु उनमें से जो विश्वासघाती रहे” का तात्पर्य उस समय के पाठ से मिलता-जुलता है कि परमेश्वर के प्रति अविश्वास कैसे मार्गदर्शन को रोक देता है। यहूदा 1:5 से भी संकेत मिलता है कि पुरानी घटनाएँ (उद्धार-यात्रा) गलत प्रेरणा से बचने की शिक्षा देती हैं।
संबंधित आयतें
यहाँ सम्मिलित cross-references से यह स्पष्ट होता है कि
आज की व्यावहारिक शिक्षा
यह बात हमें सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदार विश्वास बनाए रखना साहस और नेतृत्व की कुंजी है। परमेश्वर अपने वादों को पूरी तरह निभाता है, पर उनकी प्राप्ति उन लोगों के लिए संभव होती है जो डर को पार कर कर निर्भय होकर परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर टिके रहते हैं। यदि हम कठिनाई में भी आत्म-समर्थन और विश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे, तो हम भी यहोशू-के-यपुन के समान भविष्य की आशा पाएंगे—जो की एक नई दिशा और नए अवसरों के द्वार खोलती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
गिनती 14:30 हमारे लिए यह संकेत है कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के लिए दृढ़ विश्वास आवश्यक है। विश्वास के कारण ही कालेब और यहोशू ने अशांति के बीच भी आशा की भूमि को देखा; अन्यथा समय-समय पर डरे बैठे लोगों के लिए शपथ इतनी नहीं खुलती।