Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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मुख्य interpretive बिंदु
गिनती 14:20 में परमेश्वर की दया और सम्पन्न क्षमा-भाव का उद्घाटन स्पष्ट रूप से दिखता है। इतिहास-विवेचन के अनुसार मोशे की विनती और प्रार्थना के आधार पर यहोवा ने इज़राइल के सामूहिक दंड को स्थगित कर दिया, ताकि पथभ्रष्ट लोग एक बार फिर अवसर पाएं। मुख्य संदेश यह है कि परमेश्वर की क्षमा और दया इतने गहरे और व्यापक हैं कि वे ציבור के लिए भी परिवर्तनकारी हो सकते हैं, परन्तु विश्वास और पाप से मुक्ति का समय भी निर्दिष्ट रहता है।
पाठ के साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी contextual)
यह पाठ यहूदी समुदाय के बीच उत्साह-नाप-तोल की स्थिति में आता है: एक असफलता-घटित निर्णय और उसके बाद की दया-याचना। यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की योजना व्यक्तियों के साथ-साथ समूह के लिये भी होती है—वह एक बार फिर से विश्वस्त रूप से मार्गदर्शन जारी रखता है जब लोग अधर्म से लौटते हैं।
आस्था-तत्व और theological significance
1) क्षमा का रूप—यहोवा के वचनों में एक प्रतिक्रियात्मक-कार्य है; 2) नीति-निर्देशन—दया के समय में भी ईश्वर न्याय के मार्ग से नहीं हटा जाता; 3) आस्था का पाठ—मोशे की अंतरंग प्रार्थना से यह सिद्ध होता है कि समुदाय की अपराध-गांठ के बावजूद परमेश्वर की करुणा सक्रिय रहती है।
Cross-references (3 मिनी-सम्बन्ध) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
संक्षिप्त व्याख्या: यह संदर्भ दर्शाते हैं कि परमेश्वर का दयालुता-स्वभाव समय-समय पर पुनर्विचार और सुधार के अवसर देता है, बशर्ते लोग भक्ति में लौटें।
प्रश्न-चिंतन के लिये
छोटा निष्कर्ष
गिनती 14:20 यह दर्शाता है कि परमेश्वर का क्षमा-प्रावधान मानवीय असफलताओं के बीच भी बना रहता है। यह एक प्रेरणा है कि विपत्ति के समय भी ईश्वर की करुणा सक्रिय रहती है, और विश्वासपूर्वक पुनःस्थापन की राह खुली रहती है।
केवल उद्धरण (केवल यदि आवश्यक हों)
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से यदि स्पष्ट उद्धरण आवश्यक हो तो उनके प्रमुख विचार नीचे मापा गया है:
— Matthew Henry: “...”; “...”
— Albert Barnes: “...”; “...”
— Adam Clarke: “...”; “...”