Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 1:1 विलापगीत 1:2 विलापगीत 1:3 विलापगीत 1:4 विलापगीत 1:5 विलापगीत 1:6 विलापगीत 1:7 विलापगीत 1:8 विलापगीत 1:9 विलापगीत 1:10 विलापगीत 1:11 विलापगीत 1:12 विलापगीत 1:13 विलापगीत 1:14 विलापगीत 1:15 विलापगीत 1:16 विलापगीत 1:17 विलापगीत 1:18 विलापगीत 1:19 विलापगीत 1:20 विलापगीत 1:21 विलापगीत 1:22



विलापगीत 1:19 — संक्षिप्त समझ
इस verse में कवि बताता है कि उसने अपने मित्रों को पुकारा, पर वे धोखा दे बैठे; यहाँ तक कि याजक और पुरनिये भी भोजनवस्तु खोजने में तल्लीन हो गए और उनके भ्रष्टाचार ने नगर के प्राण ही छीन लिए। यह पंक्ति विलापगीत की गहनता को दर्शाती है: दासता, ग़रीबी और सामाजिक विश्वासघात एक साथ प्रकट होते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
विलापगीत (येरोशलेम के नाश के बाद का विद्वेषपूर्ण दुख) का प्रमुख विषय है नेताओं, मित्रों और समाज के लोगों की डिग्री-भरकी किरणें टूट जाती हैं। इस पद में कवि एकाकीपन और विश्वासघात के बीच संघर्ष कर रहा है: मित्र who are called to comfort vanish; याजक और पुरनिये, जो धार्मिक-आचार के प्रहरी माने जाते थे, अपने स्वार्थ के कारण समाज को भोजन-वस्तु की कमी से पीड़ित देखते हैं।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
धर्मशास्त्रीय पाठ और प्रत्यक्ष टिप्पणियाँ
यहां के दृश्य से ऐतिहासिक-व्याख्या में मानक ऊपर-नीचे की बात है कि नीति-न्याय, धर्म और सामाजिक नैतिकता का पतन किस प्रकार सामूहिक रूप से दुख का कारण बनता है। यह पंक्ति हमें सावधान करती है कि धार्मिक प्रतिष्ठान अपनी सुरक्षा के साधनों में लिप्त रहते हुए असाधारण संकटों के समय असहाय रह जाते हैं।
एक छोटा विषयसूचीय मार्गदर्शक
संदर्भित क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षेप
- इब्रानियों 13:5-6 की तरह प्रेरणा मिलती है कि धन-भरोसा न करें, अपने ईश्वर पर भरोसा रखें; यह verse भी विश्वासघात और भय के बीच धैर्य की मांग करता है।
- यिर्मयाह 6:13-14 जैसे पंक्तियों से यह संकेत मिलता है कि नेतृत्व अंततः समाज की चंगा-शुद्धि की दिशा नहीं देता तो भरापूरा समय द्वंद्व और निराशा बढ़ती है।
- फिरकापरस्ती के विरुद्ध आशीर्वाद-योजना में दया और न्याय के संयोजन की ओर संकेत मिलता है; समाज को नैतिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
यह पद हमें सिखाता है कि संकट के समय विश्वसनीयता और नैतिकता कितनी गहरी आवश्यक हैं। भगवान के साथ ईमानदार रहने वाले समुदाय ही विपत्तियों को सामूहिक रूप से पार कर सकते हैं। व्यक्तियों और नेताओं को अपने हितों से ऊपर समाज की भलाई को प्रथम रखना चाहिए।
महत्वपूर्ण उद्धृत टिप्पणियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन विचारों के अनुरोधानुसार यदि उनके सीधे शब्द उद्धृत मिलें, तो संक्षेप में पंक्ति-चिह्नित रूप में दिया जाएगा।