Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
विलापगीत 1:1 विलापगीत 1:2 विलापगीत 1:3 विलापगीत 1:4 विलापगीत 1:5 विलापगीत 1:6 विलापगीत 1:7 विलापगीत 1:8 विलापगीत 1:9 विलापगीत 1:10 विलापगीत 1:11 विलापगीत 1:12 विलापगीत 1:13 विलापगीत 1:14 विलापगीत 1:15 विलापगीत 1:16 विलापगीत 1:17 विलापगीत 1:18 विलापगीत 1:19 विलापगीत 1:20 विलापगीत 1:21 विलापगीत 1:22



विलापगीत 1:3 का अर्थ और संदर्भ
इस पद में संकेत मिलता है कि यहूदा, जिसने प्रभु के प्रति विश्वासघात और आघात के कारण भयावह दशाओं से गुजरना पाया, अब भी आंतरिक अशांति और परदेशी जीवन से चैन नहीं पा रही है। पंक्ति कहती है कि वह दुःखित है, दासत्व ने उसे जकड़ रखा है, और उसके निवासियों ने उसे खोजकर खदेड़ दिया है। सरल भाषा में यहूदा के दु:ख और सामाजिक-राजनीतिक टूटनी का चित्रण है, जहाँ देश के दुख से वेतनशाही निर्गत होती है और अंततः उस समुदाय की स्थिरता टूट जाती है।
प्रसंग-परिप्रेक्ष्य
विलापगीत (Lamentations) में यहूदा के विनाश के समय का अत्यंत भावुक गद्य है। यह प्राचीन यरूशलेम के पतन के बाद की पीड़ा का साहित्यिक प्रदर्शन है, जिसमें समुदाय अपने पापों के परिणामों को आँसूओं में देखता है—परदेशी प्रवाह, गुलामी की बेड़ियाँ, और सामाजिक अस्थिरता। यह पंक्ति विशेष रूप से बताए गए दासत्व और परदेशी जीवन के अनुभवों को दिखाती है, जहाँ शांति उचित सुरक्षा के बिना नहीं मिलती।
interpretive observations
संक्षिप्त थीमैटिक निष्कर्ष
संदर्भित अंश और उनके अर्थ
इस पंक्ति की भावनात्मक गहराई को समझने के लिए नीचे दिए कुछ cross-references सहायक हैं—परन्तु पूर्ण पद नहीं दिए गये:
व्यावहारिक निचोड़
कठिन समय में भी स्मरण रहे कि शांति और पुनर्स्थापना ईश्वर की कृपा और आत्म-सम्पादन से मिल सकती है। विलाप गीत यह याद दिलाता है कि चित्त को टूटे बिना नहीं बल्कि टूटे दिल के साथ भी परमेश्वर के पास आना चाहिए।
पूर्व-उद्धरण (जहाँ लागू)
Maddeningly, exact quotations from Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के सीधे शब्दों की आवश्यकता पर, इस पंक्ति के भीतर आधिकारिक उल्लेख नहीं मिलते; परन्तु उनके सामान्य विचार इस प्रकार हैं कि शोक और दासत्व के बीच ईश्वर की न्याय-नीति, परीक्षा के समय में भी उसकी कृपा की ओर ध्यान आकर्षित करती है।
क्रॉस-रेफ़रेंस (संकेत स्वरूप):