विलापगीत 1:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

सिय्योन हाथ फैलाए हुए है*, उसे कोई शान्ति नहीं देता; यहोवा ने याकूब के विषय में यह आज्ञा दी है कि उसके चारों ओर के निवासी उसके द्रोही हो जाएँ; यरूशलेम उनके बीच अशुद्ध स्त्री के समान हो गई है।

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विलापगीत 1:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

विलापगीत 1:17 पर टिप्पणी: सिय्योन हाथ फैलाए हुए है—शान्ति नहीं है

इस पद का सीधा अर्थ है: सिय्योन (यरूशलेम) की स्थिति अत्यंत दयनीय है; उसकी जनता और सुरक्षा के स्तंभ टूट चुके हैं, और उसे शान्ति मिल नहीं रही। यहोवा का आदेश है कि याकूब के चारों ओर के निवासी उसके द्रोही बन जाएँ, और यरूशलेम अशुद्ध स्त्री के समान हो गई है—यानी पाप और अशुद्धता ने जनता के नैतिक और आध्यात्मिक स्तर को गिरा दिया है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

विलापगीत एक दुःखद गीत संग्रह है जो यरूशलेम के पतन के समय की व्यथा को व्यक्त करता है। यहोवा के न्याय को देखते हुए, नतीजा स्पष्ट है: युद्ध, दलीलें and अंदरूनी पतन—सब मिलकर नगर की स्थिति को अस्थिर कर देते हैं। विशिष्ट संदर्भ में, यह आयत नगरवासियों के आचरण और परमेश्वर के विवेकपूर्ण निर्णय के बीच टकराव को दर्शाती है।

interpretive observations

  • सिय्योन का हाथ फैलना, सहायता माँगना नहीं बल्कि शासन के टूटे ढांचे की निराशा का प्रतीक है।
  • “यहोवा ने याकूब के विषय में … चारों ओर के निवासी उसके द्रोही हो जाएँ” — यह नीति-निर्णय उनकी आस्तिकता के ठहराव को दर्शाता है; परमेश्वर के विरुद्ध गिनती और विरोध निष्क्रिय नहीं रहते।
  • “यरूशलेम … अशुद्ध स्त्री के समान”—शुद्धता और पवित्रता के पालन में कमी का चित्रण, जहाँ पवित्र नगर अब अपनी आध्यात्मिक आदर्शों से दूर हो गया है।

छोटे थीमैटिक-बिंदु

  • नागरिक-पतन बनाम परमेश्वर की न्याय-निर्णय
  • आत्म-चेतना और रेला-समाज के बीच दूरी
  • चिन्ता-भरी प्रार्थना बनाम शासन की कठोर वास्तविकता

अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में क्रॉस-चर्चा)

1) यिर्मयाह 6:15–19— नगर के पतन का सार्वजनिक प्रकटन और प्रोत्साहन-तोड़। यह दिखाता है कि लोग कितनी देर तक पाप के परिणामों को अनदेखा करते हैं, फिर अन्ततः शांति खो देते हैं।

2) येरेमी 3:20— निराशा के बीच स्मरण और प्रतिपादन: कहाँ तक वे अपनी पापों के कारण पीछे हटते हैं? नैतिक पतन की हकीकत।

3) इयशायाह 1:26–27— सुधार और उद्धार का पाठ: पवित्रता लौटकर शांति पुनः स्थापित हो सकती है, यदि जनसमुदाय सचमुच परिवर्तन चाहता है।

संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष

हिंसक आक्रोश और नकारात्मक दशाओं के बीच, विश्वासियों के लिए यह संदेश है कि पवित्रता, नैतिकता और ईश्वर-निर्णय के प्रति आस्था बनाए रखना ही अस्थिर परिस्थितियों के बीच भी शांति की खोयाब को रोक सकता है। सच्चे एक्शन में आत्म-आलोचना, क्षमा-योग्य व्यवहार, और परमेश्वर के नियम के अनुरूप जीवन जीना मुख्य কথা है.

कुल मिलाकर सार

विलापगीत की यह पंक्ति एक संकेत करती है कि सिय्योन की अवस्था गहन असहायता और सामाजिक-आध्यात्मिक पतन से घिरी है। परमेश्वर के न्याय की दिशा में यह संकेतन है कि insanlar अपने आचरण के परिणाम भुगतें—परन्तु आर्त प्रार्थना और पवित्र जीवन के द्वारा ही पुनः शान्ति की राह खुल सकती है।

उद्धरण-संदर्भ नोट: इस पंक्ति के विश्लेषण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विश्लेषण से प्रेरणा मिली है; नीचे उनके नहीं-पूर्ण उद्धरणों को हल्के संदर्भ के रूप में समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

विलापगीत 1:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि मैंने जच्चा का शब्द, पहलौठा जनती हुई स्त्री की सी चिल्लाहट सुनी है, यह सिय्योन की बेटी का शब्द है, जो हाँफती और हाथ फैलाए हुए यह कहती है, “हाय मुझ पर, मैं हत्यारों के हाथ पड़कर मूर्छित हो चली हूँ।”

यशायाह 1:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 1:15 (HINIRV) »
जब तुम मेरी ओर हाथ फैलाओ, तब मैं तुम से मुख फेर लूँगा; तुम कितनी ही प्रार्थना क्यों न करो, तो भी मैं तुम्हारी न सुनूँगा; क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से भरे हैं। (नीति. 1:28, मीका. 3:4)

विलापगीत 1:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
विलापगीत 1:9 (HINIRV) »
उसकी अशुद्धता उसके वस्त्र पर है; उसने अपने अन्त का स्मरण न रखा; इसलिए वह भयंकर रीति से गिराई गई, और कोई उसे शान्ति नहीं देता है। हे यहोवा, मेरे दुःख पर दृष्टि कर, क्योंकि शत्रु मेरे विरुद्ध सफल हुआ है!

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