Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 13:1 मरकुस 13:2 मरकुस 13:3 मरकुस 13:4 मरकुस 13:5 मरकुस 13:6 मरकुस 13:7 मरकुस 13:8 मरकुस 13:9 मरकुस 13:10 मरकुस 13:11 मरकुस 13:12 मरकुस 13:13 मरकुस 13:14 मरकुस 13:15 मरकुस 13:16 मरकुस 13:17 मरकुस 13:18 मरकुस 13:19 मरकुस 13:20 मरकुस 13:21 मरकुस 13:22 मरकुस 13:23 मरकुस 13:24 मरकुस 13:25 मरकुस 13:26 मरकुस 13:27 मरकुस 13:28 मरकुस 13:29 मरकुस 13:30 मरकुस 13:31 मरकुस 13:32 मरकुस 13:33 मरकुस 13:34 मरकुस 13:35 मरकुस 13:36 मरकुस 13:37
मरकुस 13:16 परिनिर्देश: पीछे लौटने का खतरा और निरपेक्ष तत्परता
मुख्य भावधारा: इस आयत में यीशु ने भविष्यवाणी के समय के भयावह संकेतों के बीच संतुष्ट और दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया है। जो कृषक खेत में है, उसका फरमान है कि वह अपने परिश्रम का स्थान छोड़ कर पीछे न लौटे, ताकि वह तत्काल बचाव या बुलावे के समय में आगे की दिशा पकड़ सके। यह सन्देश भागने-फर्शाने की अनुकूलता नहीं, बल्कि परमेश्वर के बुलावे के समय-समय पर निखरती अनुराग-समझ और समर्पण की कसौटी है।
कथा-संदर्भ और साहित्यिक संदर्भ
यह वाक्यगroups का चित्रण है जब भविष्यवाणी के समय में भक्तो को मोड़-तोड़ से निपटना पड़ेगा। शिक्षित पाठक इसकी तुलना में अन्य उद्धरणों से समझ सकते हैं कि यह अनिवार्य गति का आग्रह है—आकस्मिक परिस्थितियों में भी सांस रोककर, पुण्य के पथ पर निरंतर आगे बढ़ना है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
यहाँ त्याग और निष्ठा के परीक्षा-समय का संकेत है। खेत से लौटना एक साधारण क्रिया है, परन्तु यह बतलाता है कि ईश्वर के बुलावे का सामना करते समय सांसारिक जमानों और वैयक्तिक सुरक्षा की चाह कब टूटती है। यीशु के साथ रहने और उसका अनुसरण करते रहने का क्रम ही हर कठिनाई में स्थिर रहने की प्रेरणा देता है।
पारिस्थितिक-व्याख्या (Cross-references with brief notes)
ये क्रॉस-रेफरेंसेज जीवन के अस्थिर क्षणों में विश्वास की गति बनाए रखने, आश्रय पाने के साधन, और परमेश्वर के साथ की गई दूरी को कम करने की सलाह देती हैं।
विचारयोग्य सवाल
संक्षिप्त निष्कर्ष
मरकुस 13:16 हमें यह स्मरण कराता है कि कठिन समय में भी जीवन के उच्चतम बुलावे के सामने हमारे कदम अड़ेंगे नहीं, बल्कि हमारे भीतर की निर्भरता और विश्वास हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। खेत का व्यक्ति अपने परिवेश से बंधा है, परन्तु वास्तविक खतरा तब है जब हम प्रभु के कार्य के मार्ग से विचलित हों। यह आयत एक ऐसे दृढ़विश्वास का आह्वान है जो विपत्ति के बीच भी प्रार्थना, सजगता और सेवा के पथ पर स्थिर रहते हुए परमपवित्र बुलाहट की दिशा में हमारा हाथ बढ़ाने को कहती है।
हिंदी मानक के अनुसार, Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के अभिलेखीय उद्धरणों से प्रेरित संकलन यह बताता है कि पीछे लौटना अपूरणीय अवसर और आत्म-निष्ठा के कारण रोका गया है।
निष्कर्षतः, यह शास्त्र-संदेश हमें स्मरण कराता है कि जीवन के हर मोड़ पर हमें सच्चे उद्देश्य के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए, ताकि परमेश्वर के कार्य में हमारी सहभागिता पूरी हो सके।