Old Testament
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नहेम्याह 1:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे प्रभु विनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर।” मैं तो राजा का पियाऊ था।
नहेम्याह 1:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
नहेम्याह 1:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नहेम्याह 1:6 (HINIRV) »
तू कान लगाए और आँखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन-रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है।

नहेम्याह 2:8 (HINIRV) »
और सरकारी जंगल के रखवाले आसाप के लिये भी इस आशय की चिट्ठी मुझे दी जाए ताकि वह मुझे भवन से लगे हुए राजगढ़ की कड़ियों के लिये, और शहरपनाह के, और उस घर के लिये, जिसमें मैं जाकर रहूँगा, लकड़ी दे।” मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर थी, इसलिए राजा ने यह विनती स्वीकार कर ली।

नहेम्याह 2:1 (HINIRV) »
अर्तक्षत्र राजा के बीसवें वर्ष के नीसान नामक महीने में, जब उसके सामने दाखमधु था, तब मैंने दाखमधु उठाकर राजा को दिया। इससे पहले मैं उसके सामने कभी उदास न हुआ था।
नीहेम्याह 1:11 — एक प्रार्थना-आधार विचार
यह पद हमें यह दिखाता है कि नहलाने-सीधे शब्दों में भी प्रार्थना कैसे कार्य का प्रेरक बन सकती है। नहेम्याह अपने दासत्व के समय की कठिनाई के बीच यह विनती करता है कि परमेश्वर सुन ले, उनके दासों के सम्मानित भय के कारण, और उनके उद्देश्य को सफल बनाए। यह verse यह संकेत देता है कि प्रार्थना बंधनों को खोल सकती है, और आशीर्वाद परमेश्वर के नाम के भय और विश्वास में रहने वालों पर बरसते हैं।
अनुवाद और संदर्भ-स्थिति
पद का मूल भाव यह है कि एक दास-प्रार्थना कण्ठ से उठती है जो स्वयं राजा के समक्ष अपनी स्थिति को नहीं बदलना चाहता, पर परमेश्वर के साथ संबंध को प्राथमिकता देता है। नहेम्याह कहता है कि वह राजा का पिएयक था, और फिर भी उसकी प्रार्थना परमेश्वर के नाम के भय मानने वालों के लिए है—यानी यह प्रार्थना समुदाय के विश्वास और निष्ठा की आह्वान है, न कि केवल व्यक्तिगत सुरक्षा की मांग।
मुख्य संदेश
1) ईश्वर के प्रति निरंतर प्रार्थना: नहेम्याह हर संभव बाधा के बीच प्रार्थना में स्थिर रहते हैं।
2) दासत्व और साहस के मेल: एक पल के लिए भी वे विश्वस्त नहीं रहते कि परिस्थितियाँ स्वयं-स्वयं बदली जाएँगी; वे परमेश्वर से सहायता माँगते हैं ताकि कार्य प्रारंभ और पूर्ण हो सके।
3) परमेश्वर का संकल्प-पुष्टि: जो लोग “तेरे नाम का भय मानना चाहते” हैं, वे एक समुदाय के रूप में ईश्वर के उद्देश्य की पूर्ति के लिए सहमत हों।
नीतिगत थीम्स और प्रेरक विचार
गूढ़ टिप्पणी — पवित्र-स्थितियाँ से संकेत
पवित्र-दृष्टिकोण यह है कि नहेम्याह ने अपनी स्थिति को एक औचित्य के रूप में नहीं रखा, वरन् यह स्वीकार किया कि परमेश्वर ही वास्तविक सुदृढ़ता है। यह दृष्टिकोण हमें यह सिखाता है कि नेतृत्व और सेवक-भाव के बीच संतुलन बना रहे।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) यह वही प्रकार की प्रार्थना दिखाती है जो दाऊद के समय में उजागर होती है—परमेश्वर के नाम की महिमा के लिए रोना-चिल्लाहट और भरोसा।
2) नहेम्याह की इन पंक्तियों में पुनः-निर्माण के लिए प्रेरणा मिलती है, जो यह बताती है कि प्रार्थना और क्रिया साथ-साथ चले तो कार्य सफल हो सकता है।
3) पुराने नियम के अन्य प्रेषणों से मिलती-जुलती प्रेरणा—ईश्वर के नाम के भय में रहने पर सहायता मिलती है।
संभावित हलके उद्धरण (पूर्व-प्रकाशित टिप्पणीकारों के संकेत)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों में उनके ऐसे बिंदु मिलते हैं: प्रार्थना में निवेदन के साथ संकल्प का मिश्रण, और ईश्वर की इच्छा के अनुसार योजना बनाना; किन्तु यहां उनके पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे हैं। यदि आप चाहें तो मैं विशिष्ट मीट्रिक उद्धरणों को संदर्भ-वार संग्रहीत कर दूँ।
प्रेरक अंतर्दर्शन
हमारे लिए यह संदेश स्पष्ट करता है कि कठिन समय में भी हमारी प्रार्थना और कर्म एक साथ चलनी चाहिए। जब हम परमेश्वर के नाम के भय के भीतर रहते हैं, तब वह हमारे प्रयासों को दिशा देता है और हमारा काम सफल बनाता है।
सूक्ष्म क्रॉस-रेफरेंसेस — व्याख्या के साथ
- प्रार्थना और नेतृत्व: दूसरे प्रकरणों में भी यह दिखता है कि उपयुक्त अवसर पर प्रार्थना करने से कार्यों को गति मिलती है।
- एक समुदाय के भय से प्रेरणा: समुदाय के विश्वास-प्रेरित भय से प्रेरित होकर व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठना संभव होता है।
- ईश्वर के उद्देश्य की पूर्ति: उद्देश्य-केन्द्रित जीवन में प्रार्थना और क्रिया एक दूसरे के पूरक बनते हैं।
आखिरी devotional विचार
जब हम अपनी स्थितियों के बीच खड़े होकर परमेश्वर के नाम के भय को याद करते हैं, तब हम पाते हैं कि हमारा छोटा-सा कदम भी ईश्वर के बड़े उद्देश्य के लिए केंद्र बन सकता है। नहेम्याह की यह प्रार्थना हमें याद कराती है कि प्रार्थना बिना क्रिया अधूरी है, और क्रिया बिना परमेश्वर की कृपा असफल हो सकती है। अगर हम अपनी ज़िम्मेदारियों को ईश्वर के हाथों में डाल दें, तो सफलता हमारे साथ चलती है।