Old Testament
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नहेम्याह 1:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हमने तेरे सामने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएँ, विधियाँ और नियम तूने अपने दास मूसा को दिए थे, उनको हमने नहीं माना।
नहेम्याह 1:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 1:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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दानिय्येल 9:5 (HINIRV) »
हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है,* और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है।

दानिय्येल 9:11 (HINIRV) »
वरन् सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस श्राप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह श्राप हम पर घट गया, क्योंकि हमने उसके विरुद्ध पाप किया है।

दानिय्येल 9:13 (HINIRV) »
जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही यह सारी विपत्ति हम पर आ पड़ी है, तो भी हम अपने परमेश्वर यहोवा को मनाने के लिये न तो अपने अधर्म के कामों से फिरे, और न तेरी सत्य बातों पर ध्यान दिया।
सीधे अर्थ का सार: हमने तेरे सामने बुराई की है
नहेम्याह 1:7 में कहा गया है कि हमारे बाप-दादा ने जो कुछ तेरे दास मूसा को दिए थे, उनके नियमों-आदेशों को हमने नहीं माना। यह अभिलक्षण एक स्पष्ट confesión है कि इस्राएलियों ने परमेश्वर के विधान से विमुख होकर अपने आचरण में निरंतर विरुद्धता दिखाई। यह वाक्य एक समुदाय के Jan-उदार आत्म-परिशुद्धि के आरम्भ को चिन्हित करता है, ताकि वे परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध को फिर से स्थापित करने के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नहेम्याह ईश्वर के घर-बंधुओं के लौटने के पश्चात यरुशलम की दीवारें पुनः बनाने के क्रम में लिखे गए ग्रंथ की एक प्रमुख दास्तान है। इस पंक्ति में मूसा के नियमों का उल्लेख एक नैतिक-धार्मिक मानक के रूप में आता है, जिसे आज की पीढ़ी को स्मरण कराते हैं कि उनका दायित्व है कि वे परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुसार चलें। खुदाय के प्रति धोखा देना और उनकी शिक्षाओं को अनदेखा करना समाज के आध्यात्मिक और नैतिक ढांचे को क्षीण करता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
गहेराई विचार
इस वाक्य से दो संदेश निकलते हैं: पहला, आंतरिक दायित्व—हम अपने रास्ते बदलने के लिए जिम्मेदार हैं; दूसरा, सामुदायिक स्मृति—जब एक समाज ग़लती को पहचानता है, तब परिवर्तन संभव होता है। यह आत्म-समर्पण और निर्णय की शुरुआत है ताकि वे पुरालेखीय नियमों के अनुसार जीयें।
संबंधित आयतें (संक्षेप स्पष्टता के साथ)
1) यहोवा के कानूनों को याद करना—वह निर्देश जो उन्हें बंधन से मुक्त करके नये जीवन की राह दिखाते हैं।
2) आचरण परिवर्तन और पश्चात्ताप—क्योंकि दोष स्वीकारने के बाद ही देवोचित परिवर्तन सम्भव होता है।
3) समुदायिक पुनर्गठन—ग़लतियों की पहचान और सामूहिक आत्म-शुद्धि से ही सामाजिक पुनर्मिलन संभव होता है।
कठिनाई पर नियंत्रण के लिए 2-3 संदर्भ-वाक्य
- परमेश्वर का दायित्व और मानव का उत्तरदायित्व—आवश्यक्ता है कि हम उसके नियमों के अनुरूप चलें।
- पश्चात्ताप और पुनर्संयोजन—गंभीर असफलताओं के बाद भी परिवर्तन संभव है, यदि उद्धारकर्ता के मार्ग पर चले जाएँ।
नीतिगत उपयोगी निष्कर्ष
_audio_खत्म—हमारी पहली और आख़िरी जिम्मेदारी परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुसार व्यवहार में आना है। परिवार और समुदाय मिलकर फिर से प्रार्थना, नीतिगत निर्णय और ईमानदार संघर्ष के साथ अपने रास्ते सुधारें।
शब्द-संवाद: उद्धरण—सूत्रधारों की सहायता
नोट: नीचे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शाब्दिक उद्धरण का प्रयोग केवल संदर्भ के लिए है; उन्होंने स्वयं इस तरह की भाषा में नहेम्याह 1:7 पर टिप्पणी दी हो सकती है।
Matthew Henry का संक्षिप्त reflection: “We have dealt very corruptly against thee; we have not kept the commandments.”
Albert Barnes: नियमों के उलटफेर की गहन आलोचना और पश्चात्ताप की आवश्यकता को उजागर करते हैं, ताकि समाज फिर से परमेश्वर के नियमानुसार सुधर सके।
Adam Clarke: यह confession एक सार्वजनिक repentance का प्रवेश है, जो व्यक्तिगत और सामाजिक परिवर्तन को जन्म देता है।
प्रायोगिक निष्कर्ष
हम स्वयं के दिल में सोचे: क्या हम अपने दैनिक व्यवहार में God's नियमों को उच्चतम मानते हैं? यदि नहीं, तो छोटे-छोटे कदमों से शुरुआत करें—पढ़ने, प्रार्थना, और नैतिक निर्णयों में ईमानदारी।