Old Testament
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नहेम्याह 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भययोग्य परमेश्वर! तू जो अपने प्रेम रखनेवाले और आज्ञा माननेवाले के विषय अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है;
नहेम्याह 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 20:6 (HINIRV) »
और जो मुझसे प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करुणा किया करता हूँ।

दानिय्येल 9:4 (HINIRV) »
मैंने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, “हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा माननेवालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करुणा करता रहता है,

व्यवस्थाविवरण 7:21 (HINIRV) »
उनसे भय न खाना; क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, और वह महान और भय योग्य परमेश्वर है।
नीहेम्याह 1:5 का अर्थ — एक संक्षिप्त समझ
इस verse में नेहेम्याह परमेश्वर yahweh को पहचानते हुए सर्वश्रेष्ठ गुणों की प्रशंसा करते हैं: वह स्वर्ग का परमेश्वर है, महान और भययोग्य; वह प्रेम रखनेवालों और obedienz माननेवालों के प्रति वादा बनाये रखता है और उनके प्रति करुणा दिखाता है। इसका उद्देश्य है- परमेश्वर की आराधना के साथ साथ उसका वादा-निष्ठापन और करुणा पर भरोसा स्थापित करना।
पृष्ठभूमि (Contextual background)
नीहेम्याह 1 का पाठ यह दिखाता है कि ईश्वरीय लोग संकट के समय में भी परमेश्वर के चरित्र को स्मरουν करते हैं—अर्थात वह महान, भययोग्य, कृपामर और वाचा-पालक हैं। यह दुआ एक नेता की व्यक्तिगत प्रार्थना है जो निर्वासन के बाद ירושלים के पुनर्निर्माण के काम के बीच में है।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष (Interpretive observations)
संकेतार्थक उद्धरण (Key quotes by earlier commentators, with caution)
यदि आवश्यकता हो, तो इन उद्धरणों से प्रेरणा ली जा सकती है—पर वे संपूर्ण पाठ नहीं हैं।
छोटे विषयसूची (Thematic points)
संबंधित वचनों के साथ संक्षिप्त संदर्भ (Cross-references with brief explanations)
व्यावहारिक निष्कर्ष (Practical takeaway)
जीवन के किसी भी कठिन समय में परमेश्वर के चरित्र पर टिके रहें: उसकी महानता और भययोग्यता को याद करें, अपने प्रेम-आज्ञाओं का पालन करें और उसकी करुणा पर निर्भर रहें। नेहेम्याह के समान हम भी कठिन समय में ईश्वर के वचनों के अनुरूप आचरण का चयन करें, ताकि पुनर्निर्माण और उन्नति की दिशा स्पष्ट रहे।