गिनती 22:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

बिलाम ने बालाक के कर्मचारियों को उत्तर दिया, “चाहे बालाक अपने घर को सोने चाँदी से भरकर मुझे दे दे, तो भी मैं अपने परमेश्‍वर यहोवा की आज्ञा को पलट नहीं सकता, कि उसे घटाकर व बढ़ाकर मानूँ।

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गिनती 22:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

गिनती 22:18 — कथा का तत्कालीनContext and परमेश्वर की आज्ञा

विलायते बालाक के पास बिलाम पहुँचे थे ताकि वे इस्राइलियों के विरुद्ध शस्त्र-सेना की मदद लें। बिलाम ने जवाब दिया कि भले बालाक कितना धन दे दे, वह परमेश्वर यहोवा की आज्ञा को पलट नहीं सकता। यह स्पष्ट करता है कि प्रेरक सत्ता धन नहीं, बल्कि परमेश्वर की आज्ञा है।

यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में क्या बताता है

यह अध्याय दिखाता है कि ईश्वर की कर्तव्यपरायणता मानवीय दबावों से ऊपर है। बिलाम की कर्तव्य-वफादारी दिखती है: वह अपनी मान्यता के अनुसार ही बोलता है, धन-लालच से प्रेरित नहीं होता। यह संदेश देता है कि परमेश्वर की नीति को मानना किसी भी बाहरी लाभ से अधिक महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य शब्दों/छवि की स्पष्टता

  • आज्ञा का पलट देना: बिलाम कहता है कि वह ईश्वर की आज्ञा को पलट नहीं सकता, चाहे कोई धन या पुरस्कार दे दे। यह आत्म-निष्ठा और परमेश्वर-केन्द्रितता का संकेत है।
  • घटाकर व बढ़ाकर मानना: यह भाव अधिक-कम बताने से मना है; परमेश्वर की चेतावनी और निर्देश अपरिवर्तनीय माने जाते हैं।

संबद्ध अंश (Cross-references) — संक्षेप में संबंध

1) व्यवस्थावचन 24:1 — आगे बढ़ते समय परमेश्वर की प्रेरणा से कथानक जुड़ता है; बाहरी आकर्षण उसे नहीं बदल पाते।

2)नीतियों 16:1-3 — धन-लालच बनाम परमेश्वर की योजना; फिर भी मन का दिल उसी तरफ रहता है जो उसे प्रिय लगता है।

3) दान्त 5:7 — कर्तव्य और लोभ के बीच संघर्ष में ईश्वर की सत्ता सबसे ऊपर रहती है।

आज के लिए अनुप्रयोग

आज के संदर्भ में यह पाठ सीख देता है कि व्यक्तिगत लाभ, राजनीतिक दबाव या सामाजिक दबाव के बावजूद वफादारी परमेश्वर की आज्ञाओं के प्रति बनी रहनी चाहिए। यह आपके निर्णयों में honesty और integrity की जरूरत पर जोर देता है—धन या लोकप्रियता के दांव के बावजूद भी यदि ईश्वर कहे, तो उसी के अनुसार चलना।

संयुक्त सार

इस Verses में बिलाम का प्रतिबद्धता स्पष्ट है: परमेश्वर की आज्ञा सर्वोपरि है, धन या बहाने उसे पलट नहीं सकते। यह पाठ हमारे नैतिक कर्तव्य की कसौटी को फिर से स्थापित करता है—धन-लालच के बावजूद भी ईश्वर के सिद्धांत पहले।

उद्धृत सारांश विचार: “चाहे धन हो, फिर भी मैं परमेश्वर यहोवा की आज्ञा नहीं पलट सकता।” यह विचार हमें आज भी प्रेरित करता है कि ईश्वर की इच्छा सर्वोच्च है, और हमारे निर्णय में उसका सम्मान सबसे पहले होना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

गिनती 22:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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