Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 22:38 — तत्कालीन संदर्भ और परमेश्वर के साथ दृढ़ विश्वास
यह पद बिलाम और बालाक के बीच के संवाद का हिस्सा है। बालाक ने बिलाम को बुलाया ताकि वह इस्राइल के विरुद्ध आशीर्वचन दे या नुकसान पहुंचाने के लिए जादुई उपाय सुझाए। बिलाम ने कहा कि उसने परमेश्वर के बुलाने के अनुसार कदम उठाया है, परन्तु उसकी वाणी उसी परमेश्वर के मुँह से निकलती है जो उसे भरोसे के साथ निर्देशित करता है।
ईश्वर के साथ विश्वास और जिम्मेदारी
इस वाक्य में बिलाम स्पष्ट करता है कि उसका संदेश परमेश्वर द्वारा निर्णयित है, न कि उसकी अपनी कल्पना का उत्पाद। यह दिखाता है कि भविष्यद्वक्ता की भूमिका अलौकिक निर्देश के अनुरोध पर निर्भर है, न कि मनुष्यों के दबाव या लाभ पर। यह विश्वास का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है: प्रेरित वाणी परमेश्वर की इच्छा के अनुसार ही रहती है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबंधित ग्रन्थ संदर्भ
1) {परमेश्वर की आज्ञा से संदेश} — यह विषय पुराने नियम के कई स्थानों में उद्घटित होता है कि भविष्यद्वक्ताओं की वाणी परमेश्वर से आच्छादनित होती है।
2) {निस्संदेह ईश्वर की योजना} — जब कोई व्यक्ति मानव योजनाओं के contrary बोलने का प्रयास करता है, तब भी परमेश्वर की योजना सर्वोच्च रहती है, जैसा कि यहाँ बिलाम के आत्म-निर्भर विचारों को रोककर ईश्वर की इच्छा स्पष्ट होती है।
3) {धैर्य और सत्य} — यह पद सिद्ध करता है कि परमेश्वर के संदेश में धैर्य और सत्य बने रहते हैं, भले ही वह असहज या कठिन क्यों न हो।
पवित्र ग्रन्थ से समन्वय
- समान चेतावनियाँ: अन्य स्थानों पर भविष्यद्वक्ताओं के सामने ईश्वर के निर्देश के बिना बोलना परन्तु गलत परिणाम देता है।
- विश्वास की धुरी: परमेश्वर की ओर से दिशा मिलने पर भी व्यक्ति को निर्भय होकर बोलना चाहिए।
आज के जीवन में उपयोगी अनुप्रयोग
एंडीटो: यह पाठ यह सिखाता है कि ईश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन के बिना कोई भी कदम उठाना बुद्धिमानी नहीं, और भविष्यद्वक्ताओं की वाणी परमेश्वर की नैतिक और आध्यात्मिक मानकों से स्वीकार्य होती है।
एतिहासिक दृष्टिकोण से प्रमुख उद्धरण (ब्लेड-योग्य)
अगर आपके पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हो, तो उन्हें नीचे उल्लेखित किया जा सकता है:
— पवित्र-वचन के अनुसार, “जो बात परमेश्वर मेरे मुँह में डालेगा, वही बात मैं कहूँगा” — यह स्पष्टता कि भविष्यद्वक्ता खुद के विचार नहीं, बल्कि परमेश्वर की प्रेरणा से बोलता है।