Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36



अर्थ का संक्षिप्त स्पष्टकरण
गिनती 24:13 में बिल्दन राजा बालाक के सामने बिर्थामनी सूना हुआ अभिशाप नहीं दे पाया, क्योंकि यहोवा की आज्ञा के प्रति बालमी की निष्ठा उनतह थी। वह कहता है कि चाहे बालाक उसे अत्यधिक लालच दे, फिर भी वह यहोवा की आज्ञा तोड़कर कुछ भी नहीं करेगा; जो कुछ यहोवा कहेगा वही मैं कहूँगा।
संदर्भ-संदर्भण और स्थिति
यह पद पंक्ति उस समय का है जब बालाक ने प्रेरित नबी बालमी से यह माना कि वह इस्राएली राज्य को दुष्ट बनाने के लिए उसे आशीर्वाद देना चाह रहा है। बालाक ने बालमी को धन-संपत्ति और सम्मान देकर प्रलोभन दिया कि वह यहोवा के वचन को तोड़े, लेकिन बालमी ने अपनी पंक्ति में स्पष्ट कहा: यहोवा की आज्ञा के खिलाफ कुछ नहीं कहेंगे, वही कहेंगे जो यहोवा कहेगा।
interpretive observations
मुख्य विषय-वस्तु
अन्य प्रासंगिक पद (संक्षेप में समझें)
उद्धृत संदर्भ-1: यहोवा की इच्छा से आगे न बढ़ना — यह दिखाता है कि भक्त एक स्थिर चेतना से निर्देशित रहता है।
उद्धृत संदर्भ-2: धन-लालच बनाम दायित्व— ऐसी परिस्थितियों में आचरण कैसे टिके रहता है।
उद्धृत संदर्भ-3: ईश्वर-निर्णय के अनुरूप जीवन— प्रेरित वक्तव्य का पालन करना आवश्यक है।
भविष्यिक प्रभाव और व्यवहारिक शिक्षा
संक्षिप्त उपयोगी Cross-References
1) अभिशासन के समय में ঈশ্বর के वचनों की निष्ठा (अनुवादित संदर्भ) — यह दिखाता है कि ईश्वर की बात सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।
2) सत्य की खोज में धन के दबाव से ऊपर उठना (अनुवादित संदर्भ) — यह जीवन में स्पष्ट नैतिक धारा बनाए रखता है।
3) आशीर्वचन के स्थायित्व का प्रमाण (अनुवादित संदर्भ) — परमेश्वर का वचन अचल रहता है, न कि संसार के कारण बदलता।
निष्कर्ष/व्यावहारिक takeaway
यह पद हमें सिखाता है कि परमेश्वर की आज्ञा में अडिग रहना मौलिक है, भले ही बड़े प्रलोभन से धन-दौलत मिल जाए। जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में ईश्वर के स्पष्ट निर्देश को ही उच्च मानना चाहिए, अन्यथा प्रयास से कुछ भी स्थाई नहीं मिलता।
टेक-टिप: यह पद नैतिक साहस और ईश्वर-निष्ठा की मिसाल है— हर स्थिति में परमेश्वर की वाणी को प्राथमिकता दें, ताकि जीवन में स्थिरता और आशीष बनी रहे।