Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36



मुख्य व्याख्या बिंदु
गिनती 24:23 में बिलाँ के साथ यह छोटा पर विचारणीय क्षण है कि शक्सो ने दिव्याचार से प्रेरित होकर भविष्यवाणी की—परमेश्वर के उद्धारक कार्य से पहले के संकट के समय में कौन जीवित बचेगा। यह पंक्ति बताती है कि भविष्यद्वक्ताओं की भविष्यवाणी परमेश्वर की योजना के अनुरूप होती है और मानव दृष्टि से परे एक उच्चतम निर्णय पर टिकती है।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यह पाठ बाइबल के चौथे पुस्तक, गिनती, बंचल में स्थित है जहां माने हुए भविष्यवक्ता बिला एवं उसके विरोधी द्वारा दिया गया विचार-विमर्श संतुलित रूप से उभरता है। यहाँ “फिर उसने अपनी गूढ़ बात आरम्भ की” से संकेत मिलता है कि यह शब्द रोशनी से भरे एक गहन संदेश का आरंभ है, न कि साधारण वक्तव्य।
theology विशेष अर्थ
1) परमेश्वर का नियन्त्रण: भविष्यवाणी में जो कहा गया है वह परमेश्वर के इरादे के अनुरूप है; 2) उद्धार की आशा बनाम दायित्व: संकट के दौरान जीवित बचे लोगों की सूचीदार स्थिति एक विश्वासयोग्य जीवनशैली का संकेत है; 3) न्याय और दया का संतुलन: न्याय के साथ देवदत्त उदारता भी दिखती है कि परमेश्वर किसे कौन सा भाग देता है।
पवित्र ग्रंथ के साथ संबंध (Cross-references)
संकेत-वाक्यों के रूप में ये संदर्भ बताते हैं कि परमेश्वर की योजना समय के साथ unfolding होती है और चुनौती के बीच भी विश्वासियों के लिए आशा बनी रहती है।
आत्मिक विचारण (Questions for reflection)
निष्कर्ष (Concluding note)
इस पद के माध्यम से यह स्मरण होता है कि परमेश्वर की चेतावनियाँ और वादे सदा एक साथ चलते हैं। जब वह जो करता है, वह जीवन के हर चरण में टिके रहते हैं, तब भी मनुष्य की समझ उसमें कम पड़ जाती है। फिर भी विश्वासियों को आशा है कि परमेश्वर का उद्धारयोजन वैधानिक और दयालु है, और जो जीवित बचेगा, वही परमेश्वर के जलसुल्क में सुरक्षित है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (exact quotes from पुरातन टिप्पणीकार)
यदि उपलब्ध हो, नीचे ऐसे उद्धरण दिए जा सकते हैं। अभी पाठ में किसी स्पष्ट पंक्ति का पूर्ण उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं किया गया है।
नोट: नीचे के अनुभाग में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलन से आवश्यक सार-संयोजन को समाहित किया गया है; केवल उपयोगी और विश्वसनीय व्याख्या के लिए चयनित विचार हुए हैं।