Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36



क्यों यह आयत महत्त्वपूर्ण है
गिनती 24:24 में बुतपरस्तों के आदेशों के विपरीत’intérêt दिखाने वाले बपतिस्मा-पूर्व भविष्यवक्ता बर्लोद्य आदि के समय के साथ मिस्र-सभ्यता के पतन का संकेत मिलता है। यहाँ परमेश्वर की योजना के भीतर राष्ट्रों के शासन की शेयरी सत्ता और उसकी सीमा का चित्रण मिलता है। इस आयत को पढ़कर हम यह समझते हैं कि इतिहास में शक्तिशाली साम्राज्यों की एक-एक करवट किस प्रकार परमेश्वर के न्याय और योजना के अनुसार घटती है, भले ही मानव के लिए वह आज्ञा-पालन कितनी भी कठिन लगे।
पार्श्व-प्रसंग और मूल संदर्भ
यह भाग बेन्यामीन के पुत्रों के मामलों के बीच आता है, जहाँ परमेश्वर ने इस्राइल के आगे आने वाले पड़ावों में नीतिगत चेतावनी दी है। विशिष्ट रूप से, यह अध्याय बिर्टिशिया के आशीर्वाद और अश्शूर-युद्ध के संदर्भ में है। आया हुआ संदेश है—जहाँ एक ओर यथार्थ सेना और समुद्री जहाजों की शक्ति है, वहीं प्रभु की योजना के विरुद्ध निर्भरता असफल होती है और अंततः उद्धार और शासन-स्थिरता केवल परमेश्वर की प्रभुता में सुरक्षित है।
मुख्य संदेश
इस आयत के दो प्रधान निष्कर्ष हैं:
महत्वपूर्ण थीम्स और समझ
• न्याय और क्रोध: परमेश्वर उन शक्तिशाली राष्ट्रों के विरुद्ध कभी-भी चुप नहीं बैठता जो उसकी व्यवस्था में हस्तक्षेप करते हैं।
• दया और विनाश का संतुलन: जहाँ एक ओर विनाश आता है, वहीं राष्ट्र-निर्वाण के पीछे एक बार फिर से मसीह-आगामी उद्धार की आशा बनती है।
संगत क्रॉस-रेफरंस (संक्षेप)
• हवेलियों के अधिकार और प्रभुत्व के विरुद्ध परमेश्वर की योजना—यशायाह 10:5-7 का संदर्भ बताता है कि शक्तिशाली शासन भी परमेश्वर के हाथों में हैं।
• अक्ल और धैर्य का पाठ—यहोशू 1:9 में परमेश्वर कहता है कि धैर्य और साहस पर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि वह अपने लोगों के साथ है।
• न्याय का समय—नीतियों 21:1-2 में कहला है कि राजा के दिल के मार्ग प्रभु के हाथ में हैं; वह उसे उसी दिशा में मोड़ सकता है।
वीर-उद्धार के लिए मार्गदर्शन
यह आयत पाठकों को यह सिखाती है कि शक्तिशाली राष्ट्र चाहे जितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, परमेश्वर के नियम-नियोजन से बाहर नहीं जा पाते। हमारी सुरक्षा और आशा परमेश्वर की योजनाओं पर निर्भर है, न कि पृथ्वी की सत्ता पर।
संक्षिप्त devotional thought
हम कभी-कभी अपने समय के अनुभवों में अमेरिका-यूरोप की शक्तियों या बड़े साम्राज्यों के पतन को देखकर चिंचित होते हैं। पर यह आयत याद दिलाती है कि परमेश्वर की किताब का क्लाइमेक्स उसकी न्याय-निष्ठा है, जो अंततः धर्मी शासन के लिए रास्ता बनाती है। 자유 और सुरक्षा की वास्तविक सुरक्षा उसी में है जो धरती की विभीषिका के बाद भी बना रहता है—यही है परमेश्वर की स्थिर सत्ता।
कथन-उद्धरण (public-domain स्रोत)
यदि आवश्यक हो, नीचे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण केवल तब उद्धृत किये जा सकते हैं:
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