Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 7:36 के पाठ का तत्काल पृष्ठभूमि और संदेश
इस पद में कुल सात दिन के परिप्रेक्ष्य से यह कहा गया है कि पाँचवें दिन शिमोनियों का प्रधान सूरीशददै का पुत्र शलूमीएल यह भेंट लेकर आया। यह भाग उन दाताओं के क्रमबद्ध योगदान का विवरण देता है जो मिस्र से निकलकर जंगल में बने tabernacle के pigments, आभूषण, और स्थापना-सामग्री के लिए समर्पित थे। यहाँ हर लेन-देन एक निश्चित क्रम में प्रस्तुत है ताकि यह दिख सके कि परमेश्वर के लिए समर्पण-संयोजन कितनी सुसंगत और सुव्यवस्थित रीति से होता है।
इस पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो संकेत मिलता है
यह verse पहली बार यह स्पष्ट करता है कि आस्था केवल व्यक्तिगत श्रद्धा नहीं, बल्कि समुदायिक सहभागिता और विधिपरक समर्पण से जुड़ी है। जो कुछ भी दिया गया, उसका उद्देश्य परमेश्वर के मन्दिर-कार्य और साधनों के बराबर रख-रखाव था। यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी को महत्व देता है; हर सदस्य की सहभागिता जरूरी है ताकि धर्म-यज्ञ और सेवक-कार्य सुचारु चले।
पाठ के महत्वपूर्ण शब्द और चित्रण स्पष्ट करना
अन्य सुसंगत संदर्भ
1) निर्गमन 38:8— मंदिर-सामग्री की व्यवस्थित व्यवस्था में सहभागिता का महत्व।
2) 2 कोरिंथ 9:7— दान की आत्मा, न कि मात्रा, परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप होना चाहिए।
3) हिब्रि 13:16— भेंट और सेवा-कार्य को न करते हुए भी न देर करें; यह विवेकपूर्ण कर्तव्य है।
इन संदर्भों से दिखता है कि दान और समर्पण एक संत-समूह के लिए क्रमवार और विनिमय-योग्य होना चाहिए ताकि परमेश्वर के उद्देश्य पूरे जा सकें।
पूर्व-आधुनिक अनुप्रयोग
आज के पाठक के लिये इसका संदेश यह है कि: समुदाय के प्रत्येक सदस्य का योगदान मूल्यवान है, चाहे वह भौतिक सामग्री हो या समय-सेवा हो। परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक संगठित, संतुलित और उदार-हृदय दृष्टिकोण अपनाएं ताकि समुदाय के दायित्व सफलतापूर्वक पूरे हों—चाहे वह मंदिर-सज्जा हो या सामाजिक उदारता। साथ ही, नेतृत्व और संस्थागत क्रम को समझना जरूरी है ताकि योगदान न्यायसंगत और सम्मेलित हो।
उच्चारण पर आधारित उद्धरण (महत्वपूर्ण) और स्रोत-चयन
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से संक्षिप्त, सहज रूप में प्रेरणा ली गई है। नीचे केवल वही उद्धरण जो स्पष्ट मिलते हैं, का उल्लेख किया गया है:
“God loves a cheerful giver.” (संदर्भ-उद्धरण, Barnes/Clarke जैसी स्पष्ट पंक्तियाँ स्पष्ट रूप से प्रयुक्त हैं—कृपया पाठ-निर्देशनानुसार संदर्भ देखें।)
नोट: ऊपर के पाठ-उद्धरण केवल संदर्भ के रूप में उद्धृत हैं; पूर्ण उद्धरण पांडुलिपि से देखें।