Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 7:75 — होमबलि के लिए एक बछड़ा, एक मेढ़ा, और एक वर्ष का एक भेड़िया का बच्चा
यह verse होमबलि (होमबलि—कर्म तीन मापकों से) के उत्सव-उत्पादन का संक्षिप्त भाग है, जिसमें हर जाति-गणना से जुड़ी विविध offerings का विवरण समाहित है। पवित्र कोष्ठ में यह बताता है कि परमेश्वर के लिए हर दिन की दैनिक निष्ठा और समर्पण के लिए विशिष्ट पशुधन चढ़ाने की व्यवस्था कैसे बनी थी।
ईश्वर का चरित्र और विश्वास पर यह पाठ क्या बताता है
यह verse परमेश्वर की व्यवस्था के प्रति आज्ञाकारी भावना को दर्शाता है—हर तपस्वी परिवार अपने हिसाब से नियमित भेंट समर्पित कर रहा है ताकि परमेश्वर के साथ उसका संबंध जीवंत रहे। यह विश्वास के साथ, समुदाय के लिए एक औचित्यपूर्ण, सुव्यवस्थित रीतिरिवाज की स्मृति भी है—कि देवता के पवित्रता और आशीर्वाद को मानने के लिए प्रकट उपहार जरूरी हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य पवित्र ग्रंथों के संदर्भ
1) यह व्यवस्था सामान्य बलिदान के सिद्धांत से जुड़ती है: सभी को कुछ न कुछ देकर परमेश्वर की महिमा में योगदान देना होता है (सामा/आस्था बनाम कर्म)।
2) यह तात्पर्य देता है कि पवित्रता के लिए भेंट का स्वरूप विविध हो सकता है, पर उद्देश्य एक है—परमेश्वर के साथ प्रेम और समर्पण की गहरी आस्था।
पूर्ववर्ती और प्रेरक टिप्पणी से संकेत
यहाँ से कुछ पुराने टिप्पणीकारों के सार-संक्षेप संकेत इस प्रकार हैं:
- Matthew Henry: भेंट की विशालता नहीं, बल्कि दिल की निष्कपटता और विश्वास की स्थिरता महत्तवपूर्ण है।
- Albert Barnes: यह व्यवस्था यह दिखाती है कि परिश्रम और समर्पण के नियम समुदाय-केन्द्रित होते हैं, ताकि हर एक सदस्य परमेश्वर के प्रति जिम्मेदारी समझे।
- Adam Clarke: यह बलिदान सामाजिक-संरचना का हिस्सा है, जो सभ्यता के भीतर पवित्रता और व्यवहार-नीति को सुनिश्चित करता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संयोगपूर्ण संदर्भ) और उनका छोटा प्रभाव
• वैलिड cross-reference: क़ानून 1: mutta— परिवार के विविध सदस्यों द्वारा प्रस्तुत भेंटों का आदान-प्रदान। यह दिखाता है कि भेंट का स्वरूप समुदाय के हर भाग की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
• cross-reference: जब परमेश्वर की विधानों का क्रम बढ़ता है, तब भेंटों में भी विविधता आती है, और यह विश्वासियों के लिए भिन्न-भिन्न दायित्वों का संकेत है।
आज की स्थिति में अनुप्रयोग
यह पाठ एक साधारण, पर गहरा पाठ है: हर वर्ग और आयु के लोग मिलकर परमेश्वर की महिमा के लिए समर्पण प्रस्तुत करें, ताकि समुदाय में विश्वास और पवित्रता बनी रहे।