Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 7:82 का तात्पर्य – पापबलि के लिये एक बकरा
यह पाठ पथप्रदर्शक घटनाक्रम के एक भाग के रूप में प्रस्तुत है, जहाँ पवित्र विधान के अनुसार each tribal representative लाता है offerings की राशि और उचित प्रथाओं के अनुसार पापबलि और कृष्ण छंदों की पूर्ति की जाती है। यहां 'पापबलि' शब्द विशेष रूप से उन दोषों के लिए है जो समुदाय के लिए जिम्मेदार ठहरते हैं; एक बकरा—जो पवित्रकरण का संकेतक है—बलि के रूप में प्रस्तुत होता है ताकि पाप और अपवित्रता से दूरी बनी रहे।
इस पाठ से ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या स्पष्ट होता है
ईश्वर अपनी पवित्रता और न्याय को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं कि पाप के लिए सही विनियोग और आहुति आवश्यक है—परन्तु यह भी दिखता है कि ईश्वर दया और पापी के लिए प्रार्थना-स्थिति बनाते हैं। पापबलि एक ऐसी व्यवस्था है जो अपराध के परिणाम को समाज से अलग करती है और पापी को भी बहाल करने की दिशा दिखाती है। इससे यह संदेश मिलता है कि ईश्वर न्याय के साथ दया भी दिखाते हैं, और पाप के बोझ से मुक्त करने का मार्ग वही है जो उसने निर्धारित किया है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की व्याख्या
अन्य प्रासंगिक पाठ
नीचे के क्रॉस-रेफरेंस जो इस प्रक्रिया की पवित्र व्यवस्था से जुड़ी समझ देते हैं:
इन क्रॉस-रेफरेंसों से स्पष्ट होता है कि पाप के लिए किसी न किसी प्रकार की विधि आवश्यक है—परन्तु वह विधि समुदाय के बीच पवित्रता के काम में समर्थ है।
आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग
1) अपनी गलतियों के लिए जवाबदेही स्वीकार करें—पापबलि की व्यवस्था बताती है कि पाप के साथ संपर्क तोड़ा जाना चाहिए और दायित्व स्वीकार करना महत्वपूर्ण है।
2) ईश्वर की दया को याद रखें—यद्यपि पाप के परिणाम स्पष्ट होते हैं, ईश्वर की व्यवस्था में दया और मरहम का मार्ग भी है।
3) समुदाय के अनुरूप शुद्धता बनाए रखें—व्यक्तिगत पवित्रता के साथ समुदाय की शुद्धता भी जरूरी है ताकि साथ चलना सरल हो।
यह commentary मूल रूप से मार्गदर्शक है ताकि पाठ की गहराई से समझ बने रह सके और आधुनिक संदर्भ में भी पाठ के सार को सुरक्षित रखा जा सके।
मूल उद्धरण उल्लेख: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से इस विषय पर जो सीधे शब्दों का उपयोग हुआ हो, उन्हें संक्षेप में जोड़ा गया है ताकि पाठ की ऐतिहासिक व्याख्या की आत्मा समझ में आये।