Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 16:5 के संदर्भ में टिप्पणी
परिस्थिति का तात्पर्य – पाठ के तुरंत पीछे का चित्र
इस आयत में स्वर्गदूतों के जलसमुद्र में फूटे बालाशुद्ध और पाप के प्रतिरूपों के दौरान, एक स्वर्गदूत जल-स्वर्गदूत ने पुकारकर कहा: “हे पवित्र, जो है, और जो था, तू न्यायी है और तूने यह न्याय किया।” यहाँ यह स्मरण कराया गया है कि परमेश्वर का न्याय सदा सत्ता में रहता है और समय के सभी निर्णय उसके सामने न्यायोचित रूप से विधानसभा होते हैं। यह उद्घोषणा, टूटे हुए संसार के अंत और परमेश्वर की मुक्ति के प्रमाण के बीच की तस्वीर का हिस्सा है। (प्रका. 11:17) से सम्बद्धता इसे और गहरा बनाती है कि परमेश्वर अपने चरित्र में पवित्र, इतिहास में सत्य और न्याय के परमापक हैं।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से कल्याणकारी संकेत
यह आयत विश्वास को यह स्मरण कराती है कि ईश्वर न्यायी है और His timing perfect है। जीवन के संकट के समय भी परमेश्वर की पवित्रता, स्मरण और न्याय की स्थिरता बनी रहती है। यह विश्वास दिलाती है कि दीन-हीन और अत्याचारित सभी लोग ultimately His न्याय के अनुसार न्याय पाएंगे।
मुख्य शब्दों या चित्रों की स्पष्टता
– पवित्र: परमेश्वर के नित्य और अलौकिक स्वभाव की ध्वनि; वह कभी भ्रष्ट नहीं होता।
– जो है, और जो था: प्रभु की असीमकालीन उपस्थिति और ऐतिहासिक क्रिया; समय के पार भी वही सत्ता।
– न्यायी: परमेश्वर का न्याय-सत्यापन, जो हर बात को सही ठहराता है, बिना पक्षपात के।
अन्य संबंधित आयताएं
– प्राकृत: घोषणा में न्याय और पवित्रता का चक्र स्पष्ट होता है कि देवत्व स्थापित न्याय के साथ है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
– प्रका. 11:17: इस संदर्भ से जुड़े उद्घोषणा का समान भाव है कि ईश्वर के राज में न्याय और प्रभुत्व स्थिर हैं।
– अन्य प्रेषणों में भी परमेश्वर के न्यायी क्रिया पर बल है; यह पाठ हमें उत्साह और धैर्य देता है कि अंत में सत्य की विजय होगी।
आज के लिए अनुप्रयोग
हमारे जीवन में चुनौतियाँ और असमानताएँ आती हैं, पर यह आयत स्मरण कराती है कि ईश्वर प्रयत्नशील है—वह पवित्र, जो है और जो था—उसके न्याय के अनुरूप सब कुछ समाप्त होगा। इसलिए हम धीरज रखें, प्रार्थना करें और अपने आचरण में विश्वास के साथ न्यायसंगत निर्णय लें। एक ऐसे परमेश्वर पर भरोसा रखें जो हर स्थिति में सत्य और न्याय के साथ है।
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षिप्त विचार
कथन में महत्त्वपूर्ण तत्वों के प्रकाश में: पवित्र तत्त्व का उच्चारण, समय पर न्याय और प्रभुत्व का संकेत—ये सब मिलकर विश्वास को दृढ़ करते हैं कि परमेश्वर गलत‑फहमियों को नहीं छोड़ते।
उद्धरण-नोट
यदि उपलब्ध हों, तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे-छोटे शब्द उद्धृत करने के लिए नीचे उनके संक्षिप्त विचारों के प्रवाह का उल्लेख किया गया है।