प्रकाशितवाक्य 11:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यह कहने लगे, “हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्‍वर, जो है और जो था*, हम तेरा धन्यवाद करते हैं कि तूने अपनी बड़ी सामर्थ्य को काम में लाकर राज्य किया है। (प्रका. 1:8)

प्रकाशितवाक्य 11:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्या बिंदु

प्रकाशितव्याकरण 11:17 में पवित्रता से प्रभु की सार्वभौमिक सत्ता और अनंत शासन का उद्घोष सामने आता है; वे कहते हैं कि परमेश्वर जो है और जो था, ने अपनी बड़ी सामर्थ्य दिखाकर राज्य किया है। यह अभिवक्ति न केवल ऐतिहासिक विजय की स्मृति है, बल्कि भविष्य के पूर्ण राज्य-प्राप्ति की आशा भी दर्शाती है।

साहित्यिक संदर्भ

यह पंक्ति विश्वासी समुदाय के जयगान-स्वर को पुष्ट करती है कि देवत्व की महिमा और उसकी सत्ता अटल है; यद्यपि वर्तमान समय में परेशानियाँ दिख सकती हैं, परमेश्वर ने इतिहास में और आगे भी शासन किया है। यह उद्घोष, कुरुवासनारहित गाथा-आती प्रतीक है जो पाठक को उस अनंत सत्ता की ओर मोड़ता है जिसकी जयकार साहित्यिक रूप से रोमन-शैली के भविष्यवाणी-गीत में भी सुनाई देती है।

धार्मिक महत्व

इस वाक्य में तीन प्रमुख विचार स्पष्ट होते हैं: (1) सर्वशक्तिमान परमेश्वर का स्वरूप—जो है और जो था—कथन में स्थायित्व है; (2) प्रभुवर राज्य की स्थापना—उसने बड़ी सामर्थ्य से राज्य स्थापित किया; (3) आभार-प्रणाली—कृतज्ञता से प्रस्तुत यह घोषणा हमारे विश्वास के अंग बनती है कि परमेश्वर का शासन निर्णायक और पूर्ण है। यह दृष्टिकोण प्रेरित-जीवन में धैर्य और विश्वास प्रदान करता है, खासकर तब जब परिस्थिति प्रतिकूल लगती हो।

सूत्र-परक संबंध

  • प्रकाशितव्याकरण 1:8 आदि—परमेश्वर का प्रकटीकरण “जो है और जो था” को संदर्भित करता है; यह राज-कथन परमेश्वर के स्थायित्व एवं नित्य शासन को दर्शाता है।
  • यशायाह 6:3 और योहान 1:14—परोपकार और महिमा के उद्घोष के साथ, परमेश्वर के प्रभुत्व का उल्लेख पाठक को आस्थात्मक गहराई देता है।
  • रोमियों 8:28-30—विश्वास के पुनर्निर्माण के साथ चरित्र-निष्कर्ष, जहाँ परमेश्वर की योजना उजागर होती है।

इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि राज-स्वरूपी दैवीय सत्ता और उसकी योजना सभी समयों के लिए एक ही आधार पर टिके हैं: परमेश्वर की महत्ता और न्यायसंगत राज्य-स्थापना।

सोच-विचार के प्रश्न

  • आप कब किसी चुनौती के समय परमेश्वर के sovereignty पर टिके रहते हैं?
  • कैसे आपकी प्रार्थनाएँ और आभार परमेश्वर के महानतम कार्य की स्मृति को पुनर्जीवित करते हैं?
  • क्या आप अपने जीवन में ईश्वर के राज्य के मूल्य को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठा सकते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यह वाक्य हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर की महान सत्ता इतिहास-स्वरूप है और वह अपने राज्य को विजय की कसौटी पर स्थापित कर रहा है। अभ्यास में इसका अर्थ है—विश्वास में स्थिर रहना, आभार व्यक्त करना, और जीवन के हर कदम में परमेश्वर के शासन की अग्रसरता को मानना।

हिंदी पाठ के लिए हल्की प्रेरणा—महत्वपूर्ण उद्धरण

डायरेक्ट उद्धरण के रूप में: आयतात्मक सन्दर्भ के कारण Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाशित पुतलों से संक्षेपित शब्द नीचे शामिल हैं (सूचित उद्धरणों के रूप में प्रयुक्त):

“यह कहने लगे, हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, जो है और जो था, हम तेरा धन्यवाद करते हैं कि तूने अपनी बड़ी सामर्थ्य को काम में लाकर राज्य किया है।”

नोट: उपरोक्त पंक्ति मूल पाठ से लिया गया है; किसी भी पूर्ण पाठ के उद्धरण नहीं दिए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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