Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 11:1 प्रकाशितवाक्य 11:2 प्रकाशितवाक्य 11:3 प्रकाशितवाक्य 11:4 प्रकाशितवाक्य 11:5 प्रकाशितवाक्य 11:6 प्रकाशितवाक्य 11:7 प्रकाशितवाक्य 11:8 प्रकाशितवाक्य 11:9 प्रकाशितवाक्य 11:10 प्रकाशितवाक्य 11:11 प्रकाशितवाक्य 11:12 प्रकाशितवाक्य 11:13 प्रकाशितवाक्य 11:14 प्रकाशितवाक्य 11:15 प्रकाशितवाक्य 11:16 प्रकाशितवाक्य 11:17 प्रकाशितवाक्य 11:18 प्रकाशितवाक्य 11:19



प्रकाशितवाक्य 11:5 — तत्काल संदर्भ और अर्थ
यह पद घड़ी-घड़ी में बिश्वासी गवाह के रूपक के रूप में यीशु की मसीहाई उद्घोषणा के साप्ताहिक चिह्न की भागीदारी को दर्शाता है। इलायसीय दासता के विरुद्ध ईश्वर की शक्तिशाली सुरक्षा, और परमेश्वर की न्यायोचित प्रतिशोध की गवाही—यही संदेश इस संदर्भ में उभरकर आता है।
ईश्वर का चेहरा और विश्वास की सुरक्षा
इस वाक्य में ईश्वर अपने सेवकों की सुरक्षा के लिए प्रतिरक्षण देता है कि उनके शत्रु कुछ भी करें, ईश्वर उन पर अपने दंड की आग बरसाने की शक्ति रखता है। यह केवल शारीरिक हिंसा का पुट नहीं देता, बल्कि ईश्वर की निरीक्षण और न्याय की सुनिश्चित गारंटी दिखाता है कि सत्य के दुभाषिए बुर्नियाँ नहीं रहेंगे। यह कथन “जो कुछ भी उन्हें हानि पहुँचाने का प्रयत्न करेगा, उसका वही परिणाम होगा” में ईश्वर के साथ विश्वास रखने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
पद के महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबद्ध पाठ और उनकी समानता
- यिर्मयाह 5:14 में भी ईश्वर के वचन की तत्काल प्रभावशीलता और सत्य की सुरक्षा की बात मिलती है, जहां दावे के अनुसार परमेश्वर अपने शब्द के अनुसार प्रत्यक्ष रूप से काम करता है।
- प्रेरितों के कर्म 5:9–10 में पवित्र आत्मा के अधिकार के साथ शास्त्र-गुणों की सुरक्षा का उल्लेख मिलता है कि विश्वासियों को किस प्रकार दुष्टों से बचाने के लिए ईश्वर कदम उठाकर प्रतिशोध देता है।
- रोम 12:19 में भलीभांति कहा गया है कि खुद परोष्तमान नहीं, परंतु ईश्वर न्याय करेगा; यह दर्शाता है कि क्षमा और न्याय के संतुलन में ईश्वर का शासन है।
युग-प्रयोग और आज का अभ्यास
हम अपने दिन-प्रतिदिन के vivir में देखते हैं कि ईश्वर की सुरक्षा कैसे भिन्न प्रकार से कार्य करती है—कभी संकटों में साहस, कभी परीक्षा के समय शांति, और कभी प्रत्यक्ष बचाव के रूप में। विश्वास हमें यह सिखाता है कि भले ही शत्रु कैसे भी कदम उठाएं, हमें विचार करना चाहिए कि ईश्वर का उद्देश्य न्याय और विश्वास की पुष्टि है।
टिप्पणी-आधार से एक संकलन
हिंदी पाठकों के लिए मार्गदर्शक टिप्पणी: ईश्वर अपने लोगों की रक्षा करने के लिए आवश्यक शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं; यह न सत्य-असत्य के बीच स्पष्ट विभाजन है, न भ्रांति की जगह—यह परमेश्वर की विश्वसनीयता पर आधारित है।
छोटे Cross-References के सारांश
इस पाठ के साथ सुसंगत, हिंसा की प्रेरणा नहीं, बल्कि परमेश्वर के न्याय और सुरक्षा की गारंटी ही पाठ का केंद्र है।
मूल उद्धरणों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समानान्वित विचारों से प्रेरणा ली गई है; यदि कभी उनके विशिष्ट वाक्यों का संक्षेप उद्धरण दिया गया हो, तो वही नीचे संक्षेप में नोट किया गया है।