Old Testament
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2 राजाओं 1:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एलिय्याह ने उस पचास सिपाहियों के प्रधान से कहा, “यदि मैं परमेश्वर का भक्त हूँ तो आकाश से आग गिरकर तुझे तेरे पचासों समेत भस्म कर डाले।” तब आकाश से आग उतरी और उसे उसके पचासों समेत भस्म कर दिया। (प्रका. 11:5)
2 राजाओं 1:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 1:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 9:54 (HINIRV) »
यह देखकर उसके चेले याकूब और यूहन्ना ने कहा, “हे प्रभु; क्या तू चाहता है, कि हम आज्ञा दें, कि आकाश से आग गिरकर उन्हें भस्म कर दे?”

1 राजाओं 18:36 (HINIRV) »
फिर भेंट चढ़ाने के समय एलिय्याह नबी समीप जाकर कहने लगा, “हे अब्राहम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा! आज यह प्रगट कर कि इस्राएल में तू ही परमेश्वर है, और मैं तेरा दास हूँ, और मैंने ये सब काम तुझ से वचन पाकर किए हैं।

दानिय्येल 3:25 (HINIRV) »
फिर उसने कहा, “अब मैं देखता हूँ कि चार पुरुष आग के बीच खुले हुए टहल रहे हैं, और उनको कुछ भी हानि नहीं पहुँची; और चौथे पुरुष का स्वरूप परमेश्वर के पुत्र के सदृश्य है।”
2 राजाओं 1:10 – संदर्भ में एक आग का चमत्कार
पद में एलिय्याह एक पचास सैनिकों के प्रमुख से कहता है कि यदि वह परमेश्वर का भक्त है तो आकाश से आग गिरकर उस समूह को भस्म कर देगी। यह घटना इतिहास ऐसे समय की है जब इजराइल के राजा अहज़्या के पुत्र आहज़िया राजा था, जिसने बपतिस्तरीय क्रम में परमेश्वर के साक्ष्य और न्याय को चुनौती दी। एलिय्याह की कथन-शक्ति से यह स्पष्ट है कि परमेश्वर की सत्ता उन परिस्थितियों में भी अधिकारपूर्ण है, जब मनुष्य उसे परीक्षण करने का प्रयास करते हैं। यह दृश्य प्रयोक्ता-विश्वास और दैवीय कानूनी अधिकार को सामने रखता है: परमेश्वर अपने प्रवर्तन और न्याय के कार्यों में स्वतंत्र है।
मुख्य अर्थ
यह verse परमेश्वर की सत्ता और नबी-प्रत्यक्ष की गंभीरता को दर्शाता है। एलिय्याह ने भीड़-भरे पचास के समूह के सामने ध्वनि-पूर्वक चेतावनी दी कि अगर वह परमेश्वर के भक्त नहीं, तो परिणाम वैसे ही होंगे जैसे संकेत दिया गया है। आग का गिरना एक निर्णायक संकेत है कि ईश्वर की अवज्ञा पर दण्ड है, और दया के स्थान पर न्याय का समय आ चुका है। यह ऐसी घटना है जो न केवल तत्काल परिणाम बताती है, बल्कि नबी-आस्था की प्रामाणिकता को भी प्रमाणित करती है।
तीन प्रमुख विषय
अन्य पवित्र ग्रंथ से सम्बन्ध
प्रेरणा के कुछ अन्य संदर्भ जिनसे इस घटना का समन्वय होता है:
इन संबंधों में सामान्य तत्त्व यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए मार्गनिर्दर्शक और न्यायकारी हैं, और उनकी सत्ता मानव कल्पना से परे है।
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में यह पाठ स्मरण कराता है कि परमेश्वर के सामने विनयं एवं विश्वास कैसे आवश्यक है। किसी भी परिस्थिति में आत्म-गौरव नहीं करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर की पवित्रता और न्याय के रहते He आपातकालीन न्याय कर सकता है। साथ ही, नबियों के शब्दों की सत्यता पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वे ईश्वर के प्रतिनिधि हैं। अपने जीवन में दृढ़ विश्वास बनाए रखें, और परमेश्वर के आदेशों के अनुरूप व्यवहार करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 1:10 में एलिय्याह का शब्द और आकाशीय आग का गिरना यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर की सत्ता किसी भी मानवीय प्रतिरोध से ऊपर है। यह घटना提醒 देती है कि परमेश्वर के राज-न्याय के समय में विश्वास और निष्ठा बनाए रखना अनिवार्य है।
पाद-चरण संदर्भ
यदि आप चाहें, तो नीचे के क्रॉस-रेफरेंसेज़ देखें: प्रका. 11:5 (दैवीय शक्ति की पुष्टि), यहोशू 6:20-21 (युद्ध में ईश्वर की सहायता), 2 राजा 2:11-12 (नबी-आस्तीन के चमत्कार।
नोट: इस पंक्तिवाक्य में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; अतः संक्षेप में उनके विचारों के सामान्य सार को समाहित किया गया है ताकि पाठक को प्रसंग की गहराई समझ मिले।