Old Testament
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2 राजाओं 1:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पचास-पचास सिपाहियों के जो दो प्रधान अपने-अपने पचासों समेत पहले आए थे, उनको तो आग ने आकाश से गिरकर भस्म कर डाला, परन्तु अब मेरा प्राण तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरे।”
2 राजाओं 1:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 1:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 26:21 (HINIRV) »
शाऊल ने कहा, “मैंने पाप किया है, हे मेरे बेटे दाऊद लौट आ; मेरा प्राण आज के दिन तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरा, इस कारण मैं फिर तेरी कुछ हानि न करूँगा; सुन, मैंने मूर्खता की, और मुझसे बड़ी भूल हुई है।”

1 शमूएल 26:24 (HINIRV) »
इसलिए जैसे तेरे प्राण आज मेरी दृष्टि में प्रिय ठहरे, वैसे ही मेरे प्राण भी यहोवा की दृष्टि में प्रिय ठहरे, और वह मुझे समस्त विपत्तियों से छुड़ाए।”

2 राजाओं 1:10 (HINIRV) »
एलिय्याह ने उस पचास सिपाहियों के प्रधान से कहा, “यदि मैं परमेश्वर का भक्त हूँ तो आकाश से आग गिरकर तुझे तेरे पचासों समेत भस्म कर डाले।” तब आकाश से आग उतरी और उसे उसके पचासों समेत भस्म कर दिया। (प्रका. 11:5)
मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
2 राजाओं 1:14 में देव-ग्रहण की योजना स्पष्ट रूप से दिखती है: ईश्वरीय दया से पहले, इस्त्रायल के राजा आदरणीय संदेशवाहक के निर्णय के कारण आकाशीय दंड हुआ, जो यद्यपि कठोर प्रतीत होता है, भगवान की नैतिक क्रम के अनुरूप है। इस पद में पलायन नहीं, बल्कि पूर्ण नियंत्रण और न्याय का सार उजागर है: परमेश्वर के पुरुष से कहा गया है—“मेरी दृष्टि में तुम्हारा प्राण अनमोल है।”
पाठ की साहित्यिक पृष्ठभूमि
यह अध्याय आहतेना के पुत्र रहाय के समय घटित है, जब इस्राएल में मृत्युदंड और शैतानी बचाव के बीच संकट फैल गया था। पंक्ति-पंक्ति में उपलब्ध करवाई गई घटना यह दर्शाती है कि परमेश्वर सत्ता में है और जब लोग अपनी क्षमताओं से आगे नहीं बढ़ पाते, तब भी वह ऐसे मानवीय अंगनों को मार्गदर्शित करता है।
अनुचित विचारों के विरुद्ध स्पष्ट चरित्र-गत्री
पंक्ति बताती है कि दो रईस-युवक पचासों के साथ आए, और आकाश से आग उनपर गिरकर भस्म कर देती है—यह एक निर्णायक संकेत है कि परमेश्वर का दंड निर्दय नहीं, बल्कि नियम के समरूपी न्याय का हिस्सा है। फिर भी पिता-पुत्र की कथा में एक हल्की-सी दयालु चिंगारी है: “परन्तु अब मेरा प्राण तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरे”—यह संदेश देता है कि परमेश्वर ने अपने दायरे में प्रजा के लिए दयालु विकल्प रखा है, भले ही आदेश कठोर हों।
संदर्भों के साथ theological संकेत
- परमेश्वर का न्याय और दया एक साथ संचालित होते हैं; उसका क्रोध अस्थिर नहीं, पवित्र क्रम के अनुसार।
- मानव विवेक और परमेश्वर का उद्धार—कठोर दंड के बाद भी एक भयावहता के भीतर करुणा का संकेत मिलता है।
कृषित cross-references और संक्षिप्त व्याख्या
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि दंड और दया एक ही परमेश्वर के दो पहलू हैं, जो उसकी पवित्रता और करूणा को अभिव्यक्त करते हैं।
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इसVerse में हम पाते हैं कि परमेश्वर सत्ता में है और जब वह आदेश देता है, तब उसका न्याय और उसकी करुणा एक साथ काम करती है। कहावत की तरह, “मेरे प्राण तेरी दृष्टि में अनमोल हैं,” यह दर्शाता है कि परमेश्वर के लिए हर जीव का मूल्य है, और उसकी राह में कठोरता के साथ भी एक गहरी नीति और दया है।
लेखन-योगदान: इस पाठ पर आधुनिक पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों के साथ-साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डायरी टिप्पणियों से समर्थित विचार एक सजग समेकन बनाते हैं, जहाँ कठोर दंड के साथ परमेश्वर की करुणा की भूमिका स्पष्ट की जाती है। Note: किसी भी सटीक उद्धरण को केवल उनकी वहीवर्ती पंक्तियाँ के रूप में जोड़ा गया है, पूरी कविता नहीं दी गई है।