Old Testament
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2 राजाओं 1:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर राजा ने तीसरी बार पचास सिपाहियों के एक और प्रधान को, पचासों सिपाहियों समेत भेज दिया, और पचास का वह तीसरा प्रधान चढ़कर, एलिय्याह के सामने घुटनों के बल गिरा, और गिड़गिड़ाकर उससे विनती की, “हे परमेश्वर के भक्त मेरा प्राण और तेरे इन पचास दासों के प्राण तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरें।
2 राजाओं 1:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 1:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 1:5 (HINIRV) »
तुम बलवा कर-करके क्यों अधिक मार खाना चाहते हो? तुम्हारा सिर घावों से भर गया, और तुम्हारा हृदय दुःख से भरा है।

निर्गमन 11:8 (HINIRV) »
तब तेरे ये सब कर्मचारी मेरे पास आ मुझे दण्डवत् करके यह कहेंगे, 'अपने सब अनुचरों समेत निकल जा।' और उसके पश्चात् मैं निकल जाऊँगा।” यह कहकर मूसा बड़े क्रोध में फ़िरौन के पास से निकल गया।

गिनती 12:11 (HINIRV) »
तब हारून मूसा से कहने लगा, “हे मेरे प्रभु, हम दोनों ने जो मूर्खता की वरन् पाप भी किया, यह पाप हम पर न लगने दे।
पाठ का सीधा अर्थ
2 राजाओं 1:13 में राजा एलग का साहस और विश्वास एक असामान्य परीक्षा से जूझ रहा है। एलिय्याह प्रेषित के सामने घुटनों के बल गिरकर विनती कर रहा है, क्योंकि वह पहले दो बार भेजे गए सैनिकों से अकेला लौट आया था और अब तीसरे दल के आने के लिए भी विनती करता है कि उनकी आत्माओं की सुरक्षा हो। उद्धृत शब्दों में, वह परमेश्वर के भक्त के रूप में आस्था और दया की मिसाल देता है कि जीवन की कीमत परमेश्वर के सम्मान से अधिक नहीं।
पश्चात्वरणीय पृष्ठभूमि
यह घटना उस समय की है जब ईरत्रेल के राजा एक-एक करके एलिय्याह के परमेश्वर के साथ समन्वय से डरते हुए चढ़ाई कर रहे थे। अल्पावधि में, यह कहानी दिखाती है कि परमेश्वर के दूत के सामने मानव-धर्म के सामने की दृढ़ता कितना सीमित हो सकता है; फिर भी यदि विनय और दया हो, तो परमेश्वर उनकी बात सुन सकता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
अन्य आयाम तथा क्रॉस-रेफरेंसेस
1) धर्मशास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार, परमेश्वर के दूत के सामने विनय—यही वह आस्था है जो संकट के समय भी बनी रहती है (देखें शब्द-आधार में विनय की भूमिका)।
2) समान संदेश पृथ्वी के अन्य भागों में भी मिलता है जहाँ सीधे-सीधे बाधाओं के बीच परमेश्वर के अभिषिक्त के प्रति विश्वास बना रखने को कहा गया है।
3) पुराने नियम में क्षेत्रीय राजाओं और दूतों के बीच का यह टकराव एक सामान्य पाठ है जिसमें ईश्वरीय सुरक्षा और मानवीय दया का सम्मिश्रण दिखता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस verse में हम देखते हैं कि परमेश्वर के भक्त की आड़ में विनय और विश्वास कितना शक्तिशाली हो सकता है। राजा का तीसरे तैनाती से भी जो संदेश निकलता है, वह है—यदि परमेश्वर की इच्छा सामने हो, तो उनकी दया और सुरक्षा निःसंदेह साथ रहती है।
पूर्वार्ह उद्धरण (स्थित मूल्यांकन)
यदि आपMatthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के उद्धरणों में से एक के छोटे अंशों को देखें, तो वे इस प्रकार के दृश्यों में परमेश्वर की निष्ठा, भक्तों की विनय और दया के महत्व को रेखांकित करते हैं कि परमेश्वर ही सच्चे प्रयोजन का सार है।
कंटेक्स्ट से स्पष्ट पंक्तियाँ
यह दृश्य यह दिखाता है कि परमेश्वर के भक्त के सामने जीवन की सुरक्षा सबसे बड़ी है; बाहरी शक्ति कभी-कभी असहाय पड़ जाती है, पर ईश्वर की कृपा से भीतर से साहस बना रहता है।