Old Testament
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2 राजाओं 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अहज्याह एक जालीदार खिड़की में से, जो शोमरोन में उसकी अटारी में थी, गिर पड़ा, और बीमार हो गया। तब उसने दूतों को यह कहकर भेजा, “तुम जाकर एक्रोन के बाल-जबूब* नामक देवता से यह पूछ आओ, कि क्या मैं इस बीमारी से बचूँगा कि नहीं?”
2 राजाओं 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 राजाओं 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 8:7 (HINIRV) »
एलीशा दमिश्क को गया। और जब अराम के राजा बेन्हदद को जो रोगी था यह समाचार मिला, “परमेश्वर का भक्त* यहाँ भी आया है,”

2 राजाओं 1:16 (HINIRV) »
और उससे कहा, “यहोवा यह कहता है, 'तूने तो एक्रोन के बाल-जबूब देवता से पूछने को दूत भेजे थे तो क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं कि जिससे तू पूछ सके? इस कारण तू जिस पलंग पर पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।'”

मत्ती 10:25 (HINIRV) »
चेले का गुरु के, और दास का स्वामी के बराबर होना ही बहुत है; जब उन्होंने घर के स्वामी को शैतान* कहा तो उसके घरवालों को क्यों न कहेंगे?
मुख्य Interpretive बिंदु
2 राजाओं 1:2 में अहज्याह का पतन यह बताता है कि राजा की शक्ति कितनी सीमित होती है जब परमेश्वर की योजना उसके बजाय निर्धारित हो जाती है। जालीदार खिड़की से गिरना और तूत-तांक कर देवताओं से सहायता माँगना उस क्रम को उजागर करता है जिसमें मनुष्य अपने भय और आत्म-विश्वास के कारण ईश्वर के निर्देशों को अनदेखा कर देता है। यह पद हमें यह सिखाता है कि विपत्ति के समय भी परमेश्वर की सत्ता सर्वोपरि है और बिन बुलाए देवताओं से पूछना मानव-स्वामित्व का परिणाम नहीं, बल्कि निर्बलता का संकेत है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यहाँ अहज्याह का रोग चिह्नित है और दूतों के द्वारा एक्रोन के बाल-जबूब नामक देवता से पूछने की बात है—जो असली ईश्वर के विरुद्ध एक आक्रामक विकल्प है। इतिहास-आधारित चरित्र-विधि में यह राजा की रजा-निष्ठा और राजनीतिक निर्णयों को दिखाता है: वह एक ऐसी अवस्था में है जहाँ राजनीतिक-धार्मिक जिम्मेदारियाँ एक साथ दबाव डालती हैं। यह पाठ एक स्पष्ट चेतावनी देता है कि स्वामित्व के फलस्वरूप मूर्तिपूजा का सहारा लेने से व्यक्ति अपने रोग के समय भी ईश्वरीय निर्देशन से दूर हो जाता है।
धार्मिक महत्व
- परमेश्वर का एकतंत्र शासन: राजा की बीमारी भगवान के निर्णयन के साक्षात चिह्न के रूप में उभरती है।
- विश्वास बनाम विश्वासघात: डर के समय दूतों को भेजकर मूर्तिपूजा से मार्ग पूछना, विश्वास की आस्था बनाम अनावश्यक कर्तव्य-बाधाओं के बीच संघर्ष दिखाता है।
Cross-References और उनकी छोटी-सी व्याख्या
ये संदर्भ मुख्य पाठ के साथ परस्पर संवाद बनाते हैं—जहाँ हम देखते हैं कि भय के समय भी परमेश्वर अपनी योजना पूरी करता है और मूर्ति-उपासना के विकल्प के बजाय विश्वास की राह को संतुलित करता है।
परिचर्चा के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 1:2 हमें समझाता है कि विपत्ति के समय भी ईश्वर की इच्छा सर्वोपरि है, और मूर्तिपूजा atau मानव-निर्भर उपाय अस्थायी सुरक्षा दे भी दें, परन्तु वे परमेश्वर की गाथा को नहीं बदलते। अहज्याह की कहानी यह स्मरण कराती है कि भरोसा केवल राजनीतिक शक्ति या सांसारिक उपायों पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन पर टिका होना चाहिए।
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- एडम क्लार्क: “परमेश्वर की परीक्षा और मानवीय अयोग्यता” पर सामान्य प्रेरणा देती हैं कि राजा जैसे लोग भी ईश्वर के प्रमाण से नहीं बचते।
- मैथ्यू हेन्री: “विश्वास का परीक्षण व्याकुलता के समय आता है”—यह पाठ ईश्वर के इरादे के बिना राजनीति की मार्गदर्शिका नहीं बनना चाहिए।
- अल्बर्ट बार्न्स: “ईश्वर के साथ सीधे संबंध में ही सुरक्षा है, मूर्तिपूजा कभी वास्तविक समाधान नहीं देती।”
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