Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 राजाओं 1:4 बाइबल पद की व्याख्या
2 राजाओं 1:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए अब यहोवा तुझ से यह कहता है, 'जिस पलंग पर तू पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।'” तब एलिय्याह चला गया।
2 राजाओं 1:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 राजाओं 1:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 राजाओं 1:6 (HINIRV) »
उन्होंने उससे कहा, “एक मनुष्य हम से मिलने को आया, और कहा कि, 'जिस राजा ने तुम को भेजा उसके पास लौटकर कहो, यहोवा यह कहता है, कि क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं जो तू एक्रोन के बाल-जबूब देवता से पूछने को भेजता है? इस कारण जिस पलंग पर तू पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।'”

2 राजाओं 1:16 (HINIRV) »
और उससे कहा, “यहोवा यह कहता है, 'तूने तो एक्रोन के बाल-जबूब देवता से पूछने को दूत भेजे थे तो क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं कि जिससे तू पूछ सके? इस कारण तू जिस पलंग पर पड़ा है, उस पर से कभी न उठेगा, परन्तु मर ही जाएगा।'”

यहेजकेल 18:4 (HINIRV) »
देखो, सभी के प्राण तो मेरे हैं*; जैसा पिता का प्राण, वैसा ही पुत्र का भी प्राण है; दोनों मेरे ही हैं। इसलिए जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा।
मुख्य interpretive बिंदु
2 राजाओं 1:4 में यहोवा का यह कथन कि राजा आहेजिया के संकट के समय उसका पलंग से उठना मुमकिन न होगा, उसे एक ऐसी निर्णायक चेतावनी के रूप में दिखाता है जो रोग, प्रतिबन्ध या निर्बलता से उत्पन्न नहीं, बल्कि तात्कालिक चेतावनी है कि एक असंतुलित कर्म के परिणामस्वरूप जीवन-निर्णय होता है। एलिय्या यहूदा के धार्मिक-चक्र में एक मोहभंग या गलत विश्वास के कारण राजा के पाप-कार्य से सावधान रहने की प्रतीकात्मक चेतावनी देते हैं — जो हुआ उसका कारण न होकर पूर्वसूचना है। यह वचन हमें परमेश्वर के न्याय के समय-सार और दया के संकेत दोनों का बिंब दिखाता है: एक तरफ सत्ता का डराने वाला परिणाम, दूसरी तरफ परमेश्वर की सच्ची चेतावनी और अवसर for repentance.
साहित्यिक संदर्भ (पाठ का साहित्यिक ढांचा)
यहाँ द्वार-चौकसी में एलिय्या का संदेश सीधे राजा अज़रीया के शरारती कर्मों से जुड़ता है। वाक्य की संरचना एक स्पष्ट पूर्वसूचना है: पलंग पर स्थित स्थितियाँ, राजसी सुरक्षा का भ्रम और मृत्यु का निष्कर्ष। यह पाठ न सिर्फ एक व्यक्तिगत रोग की बात है, बल्कि उस तंत्र की आलोचना है जो गलत विश्वास और दखल-अनदेखी से बनता है—हठधर्मी पापी आचरण के परिणामस्वरूप मौत।
theological significance (धार्मिक महत्त्व)
- परमेश्वर की अनुमति से उत्पन्न निर्णय का सच: यहोवा का शब्द एक कानून स्वर है जो राजा के लिए अंततः मृत्यु का नियत समय बताता है।
- दया और न्याय का संतुलन: यह चेतावनी एक कठोर निष्कर्ष है, पर साथ ही यह एक अवसर भी देता है कि राजा अपने पाप-व्यवहार पर पछतावे के साथ वापस आये।
अनुक्रिया: अन्य शास्त्रीय टिप्पणी के संकेत
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक विवेचनाओं में यह धारणा उभरती है कि यह संदेश परमेश्वर के पवित्र न्याय का प्रमाण है जो आत्मविश्वासपूर्ण विश्वासघात और आख्यान के विरुद्ध कठोरता से बोलता है। ये टिप्पणीकार सामान्यतः कहते हैं कि इलियाह का प्रस्थान एक स्पष्ट प्राक्टिक संकेत है कि राजा के आचरण में अब सुधार संभव नहीं; किन्तु यह भी कि परमेश्वर अपने दया-काल में फिरौती के अवसर देता है। (नोट: नीचे उद्धृत स्पष्ट शब्द उनके लेखन-उद्धरणों से मिलते हैं, यदि उपलब्ध हों।)
cross-references (संदर्भ-योजना)
इन संबंधों से पाठ यह स्पष्ट करता है कि समय-सीमा के भीतर आत्म-विश्वास के साथ परमेश्वर के मार्ग पर लौटना चाहिए, क्योंकि जीवन-दायिनी कृपा और चेतावनी दोनों एक ही स्रोत से आती हैं।
Reflection questions (विचार के प्रश्न)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन परमेश्वर के न्याय-निष्ठ और करुणा-युक्त स्वर को एक साथ प्रस्तुत करता है। पलंग से उठना असंभव बताने वाला यह शब्द राजा के पाप-वृत्ति पर सीधी चोट है, परन्तु यह एक चेतावनी नहीं, एक अवसर भी है ताकि वह अपने तरीके बदले और परमेश्वर की राह पर लौटे। सच्ची सुरक्षा और जीवन उसी में है जब हम अपने विश्वास को सत्ता के भ्रम से हटाकर परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार चलें।
नोट: यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विचारों से प्रेरित सामान्य पारंपरिक व्याख्या पर आधारित है; कोई भी विशिष्ट उद्धरण आवश्यक संदर्भों के साथ ही उद्धृत किया गया है।